संघर्ष से सशक्तिकरण तक: एक महिला की प्रेरणादायक यात्रा
तीन साल से मैं अपने पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की पीड़ा झेल रही थी। तनाव का असर इतना बढ़ गया था कि अपने दोनों बच्चों पर ध्यान देना भी मुश्किल हो गया था। ज्वाइंट फैमिली में रहते हुए, इस दर्द को अपने तक ही सीमित रखना पड़ा, क्योंकि मायके या ससुराल में किसी से भी इस बारे में बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। पढ़ाई-लिखाई में एमए और बीएड करने के बाद टीचिंग में करियर बनाने का सपना था, लेकिन इस परेशानी के कारण वो भी ठप हो गया।
एक दिन, धैर्य टूट गया और मैंने अपनी सास को सब कुछ बता दिया। फिर उसी समय अपने पति से सीधे बात की, अपने गुस्से का इज़हार किया। मैंने 'नो रिएक्शन, लेस कम्युनिकेशन, और नॉमिनल रिलेशन' जैसे सिद्धांत अपनाए, जो मैंने एक हेल्प पेज पर पढ़े थे। अब सिर्फ बच्चों और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती हूं। पति और मैं एक ही घर में रहते हैं, लेकिन मैंने अलग रूम में सोना शुरू कर दिया है।
अब मेरे पति को भी हमारे बीच की दूरी महसूस हो रही है, और शायद इसीलिए वह शांत रहने लगे हैं। मैंने ठान लिया है कि उन चीजों की टेंशन नहीं लेनी, जिन पर मेरा नियंत्रण नहीं। अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस करने का फैसला लिया है, ताकि जल्द ही नौकरी कर आत्मनिर्भर बन सकूं। तलाक के बारे में नहीं सोच सकती क्योंकि मेरे बच्चे मेरी प्राथमिकता हैं। पर मानसिक रूप से अलगाव ही इस रिश्ते में मेरे लिए सही विकल्प है।
मैंने ये सीखा है कि ऐसे रिश्ते में आत्म-सम्मान बनाए रखने का एकमात्र तरीका अपनी खुद की कमाई और आत्मनिर्भरता है। अब पहले जैसा तनाव और घुटन महसूस नहीं होती। अब मैं उस पुराने दर्द भरे जीवन से बाहर आ चुकी हूं। यह कहना चाहूंगी कि हर महिला के अंदर आत्म-समर्थता की ताकत होती है। हमें अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करना चाहिए। हम निगेटिव होकर सब खो सकते हैं, या पॉजिटिव होकर अपने आपको नया जीवन दे सकते हैं। मैंने दूसरा रास्ता चुना है और ये जीवन में पॉजिटिव एनर्जी लाने का फैसला सही साबित हुआ।
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