OCD और मेरी बेटी

जब मेरी शादी हुई तो पति से शुरू से ही मेरी अंडरस्टैंडिंग बनी नहीं। हम दोनों में बहुत बहस होती थी। पति को हर बात बहुत गुस्से से बोलने की आदत है। मैं कामकाजी महिला हूं। जब तक अलग होने की सोचती, एक बेटी हो गई। फिर उस बेटी के लिए पति के साथ रिश्ता निभाना पड़ गया। फिर तो एक दो प्रयास करने के बाद भी मैं इस रिश्ते से अलग नहीं हो पाई। बेटी से उसके पापा ने ज्यादा मतलब नहीं रखा, बस जरूरत पूरी करते रहे। मैंने उसे प्यार से पाला-पोषा। जब बेटी सात साल की हुई, तब मुझे एक बेटा हुआ। बेटी को लगा कि उसके भाई को घर में ज्यादा प्यार मिल रहा है तो वो चिढ़ने लगी। उसके मन में बैठ गया कि भाई की वजह से बचपन में उसकी पिटाई की गई। वो अपने भाई से नफरत करने लगी।
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उसकी नफरत उम्र के साथ बढ़ती गई और मानसिक बीमारी में बदल गई। आज मेरी बेटी सतरह साल की है और बेटा दस साल का। बेटी को मनोचिकित्सक के पास इलाज के लिए ले गई। उन्होंने जो दवाई दी, बेटी ने नहीं खाई। न ही उसने डॉक्टर को कोई जवाब दिया। दिन-रात बस फोन लेकर बैठी रहती है। उसने घर में हम सबको परेशान करने का टारगेट बना रखा है। घर में दादा, दादी भी हैं, वो घर के एक भी सदस्य को पसंद नहीं करती। अपने सारे छोटे छोटे काम मुझसे कराती है। अपने बेड से नीचे पैर नहीं रखती।
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डॉक्टर ने बताया कि बेटी को ओसीडी है जिसमें एक ही काम को बार-बार करने की बीमारी होती है। बेटी को साफ-सफाई बार-बार करने की ओसीडी है। वह सारे कम भी मुझसे कराती है। कभी चप्पल धोना, कभी कलम धोना, कभी क्लिप धोना तो कभी डायरी साफ करना, पिछले तीन साल से उसके सारे काम मैं कर रही हूं। इसके बाद भी वो मुझे और मेरे पति को पागल कहकर बुलाती है। मेरे ज्यादा से ज्यादा पैसे खर्च कराना भी उसका टारगेट रहता है। रात में बारह एक बजे कभी भी नहाती है। सबको डिस्टर्ब करती है।
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अपने भाई से तो दुश्मनी रखती है। जबकि भाई उसके साथ ठीक से व्यवहार करता है। बाहर से खाना ऑर्डर करना और दिनभर फोन देखना, ये उसका रुटीन है। स्कूल, ट्यूशन जाती है लेकिन घर में कभी सेल्फ स्टडी नहीं करती, सबको परेशान करती रहती है। बेटी की ये सारी हरकतें बर्दाश्त करते हैं क्योंकि बेटा भी दस साल का हो चुका है और वो इन सब चीजों से परेशान होता है। घर में शांति रखने के लिए बेटी का सबकुछ चुपचाप करती हूं। पर बेटी का एग्रेशन और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। मुझे तो बिल्कुल आराम करने नहीं देती। ऑफिस से काम करके आती हूं तो घर में मुझे काम पर लगाए रखती है। हर समय मुझे पागल बोलकर लड़ती रहती है और काम कराती रहती है।
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मैं प्रयास करती हूं कि शांत रहूं लेकिन बर्दाश्त नहीं कर पाती तो बेटी से बहस होती है। वो अब खुलकर बोल रही है कि ऐसे ही रहूंगी, जो करना है कर लो, मैं किसी से डरती नहीं हूं। परिवार के लोग मुझे कहते हैं कि तुम मां हो, यह सब बर्दाश्त करके भी करो। लेकिन मैं भी एक इंसान हूं। मुझे रात को सोते से उठाकर काम कराती है। मुझे अब बेटी से डर लगने लगा है। मुझे अपने ही घर में घुटन हो रही है। बेटे की लाइफ भी खराब हो रही है क्योंकि हर समय घर में बेटी क्लेश करती है। पति भी कोई बात शांति से नहीं बोलते, गुस्से से बोलते हैं। क्लेश की वजह से बेटे पर भी ध्यान नहीं दे पाती।
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क्या मुझे अपना जीवन जीने का कोई हक नहीं? शादी के बाद एक खराब पति के साथ निबाह किया और अब ये बेटी, जो मुझे अपना गुलाम, अपना बंधक समझती है। ऐसे जीने से दुनिया में न जीना अच्छा है। मुझे इस घर में ठीक से सोने तक नहीं दिया जा रहा है। खाना भी खाती हूं तो कभी क्लेश के बिना नहीं खा पाती। मैं चाहती हूं कि बेटी के खिलाफ कोई लीगल एक्शन न लूं क्योंकि बेटी है। पर कोई ऐसा तरीका हो कि बेटी को भी प्रॉब्लम न हो और मैं भी अपनी लाइफ जी सकूं। क्या कोई ऐसा तरीका है?

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