मेरी उम्र 26 साल है और मैं बचपन से ही कम बोलने वाला इंट्रोवर्ट किस्म का रहा। वैसे मेरे घर का माहौल कलह भरा था जिसमें मैं धीरे-धीरे ऐसा हो गया। मेरे इंट्रोवर्ट होने की वजह से परिवार, पड़ोसी से लेकर स्कूल तक मुझे आलोचना का सामान करना पड़ा। बस हर जगह यही कहा गया कि तू किसी से ज्यादा मिलता-जुलता नहीं है, ज्यादा बात नहीं करता है, यही तेरी कमी है। यह सुन-सुनकर मेरे अंदर कॉन्फिडेंस में बहुत कमी आ गई। वैसे पढ़ाई लिखाई करने में मैं सही रहा। तीन-चार कंपनियों में नौकरी भी की लेकिन मैं दस महीने से ज्यादा कहीं टिक नहीं पाया। कंपनियों में भी मेरे स्वभाव को लेकर लोगों ने वही सब बातें कहीं। मुझे वहां हीनभावना महसूस होने लगती है इसलिए नौकरी छोड़ देता हूं और कुछ दिन खाली रहने के बाद आजीविका के लिए फिर नौकरी पकड़ता हूं। बस यही चक्र चल रहा है।
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अब ये हाल है कि जान-पहचान के लोगों से आंखें मिलाने से कतराता हूं, बात करना तो दूर की बात है। मुझे यह समझ नहीं आता कि यह मेरा बेसिक नेचर है या फिर कोई मनोविकार है? यही मेरा मूल स्वभाव है या ये कोई मनोरोग है? अगर यह मनोरोग है तो मुझे लगता है कि यह कभी नहीं ठीक होगा क्योंकि यह तो बढ़ता ही गया। पहले मैं सोचता था कि बीस इक्कीस साल का हो जाऊंगा तो अपने आप सब ठीक हो जाएगा लेकिन कुछ ठीक नहीं हुआ। उस उम्र में यह सब जीवन को कम प्रभावित कर रहा था लेकिन अब तो ये मेरे लिए बहुत बड़ी प्रॉब्लम बन गई है। मेरा जीवन पूरी तरह से इससे तहस-नहस हो रहा है।
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मैं जहां जाता हूं, वहां मुझे लगता है कि लोग मुझे निगेटिव तरीके से जज कर रहे हैं या फिर मेरा मजाक उड़ाया जा रहा है। लगता है जैसे लोग मुझे अजीब नजरों से देख रहे हैं। मैंने हमेशा दूसरे लोगों से अपने बारे में यही कहते सुना कि तू शर्माता बहुत है, सोचता ज्यादा है। लेकिन मुझे लगता है कि बात सोचने और शर्माने से कहीं आगे की है। जो मेरे अंदर हो रहा है, उसे कोई और ठीक से नहीं समझ पा रहा। मैं जॉब करने के लिए होमटाउन से दूर दूसरे शहर आया हूं। अभी हाल में ही मैं जहां जॉब करता था, वहां जाना छोड़ दिया। मुझे अपने घर जाना भी बिल्कुल पसंद नहीं है क्योंकि मुझे लगता है कि घर का खराब माहौल ही मेरी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है। यार-दोस्त भी एक-दो ही बचे हैं। क्या मेरी इस समस्या का कोई समाधान है?
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