असंतोष और विवाह

एक औरत कितने जुल्मो सितम से गुजर कर जीती रहती है। मैं एमपी से हूं। साल 2000 में मेरी शादी हुई थी। मेरे पापा और ससुर दोनों सरकारी नौकरी में थे। पापा ने दहेज देकर धूमधाम से शादी की लेकिन शादी के बाद पता चला कि पति अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था। उसने मेरे ऊपर मायके में रहने के लिए दबाव डाला ताकि वो अपनी प्रेमिका के साथ आराम से रहे। वो मुझे पापा से पैसे मांगने को भी बोल रहा था। उसने करीब दो लाख रुपए मुझे मायके से लाने को कहा। जब मैं नहीं मानी तो मुझे बहुत पीटा और बेहोशी की हालत में कुएं में फेंक दिया। लोगों से इधर बोल दिया कि पड़ोसी के साथ भाग गई।
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उधर, कुछ लोगों ने मुझे कुएं से निकालकर बचाया और बेहोशी की हालत में ही अस्पताल लेकर गए। मैं कहीं पुलिस में रिपोर्ट न कर दूं और उसका बाप सरकारी नौकरी से हाथ न धो बैठे, वो भागा-भागा मेरे पास आया। इधर, मेरे पापा पुलिस में रिपोर्ट लिखाने नहीं गए क्योंकि ससुराल वाले मेरे भाई को जान से मारने और बहन की इज्जत को लेकर धमकी देने लगे थे। मैंने फिर तलाक लेने की बात चलाई तो ससुराल वालों ने मुझ पर ही जाने क्या-क्या आरोप लगाने का काम किया। इस तनातनी के बीच मेरे पति को न पैसा मिला और न ही प्रेमिका। प्रेमिका छोड़कर चली गई तो वो दुनिया से चला गया। मर गया।
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फिर बहुत कोशिशों के बाद मेरी दूसरी शादी साल 2018 में राजस्थान में हुई। वहां मैंने अपनी जिंदगी के बारे में सारी बातें बता दी थीं। लेकिन शादी से पहले यहां पति ने झूठ बोला था। यहां भी पति दूसरी औरतों से रिलेशन रखने वाला निकला। पति के छोटे भाई से और ससुराल में मुझे अपनी इज्जत को बचाए रखने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। साल 2021 में मैं अपने पापा को बुलाकर पुलिस के पास जाने लगी तो कहने लगे कि पुलिस क्या कर लेगी। हुआ भी वही। मैं पुलिस के पास गई तो एक दिन के लिए ससुरालियों को हवालात में रखा फिर पैसे लेकर छोड़ दिया। मेरी रिपोर्ट नहीं लिखी। उल्टे मेरे पापा को पुलिस ने बुरा कहा। पापा भी एक दिन हार्ट अटैक से गुजर गए।
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इसके बाद से मैं ससुराल में ही रह रही हूं। अब मुझे अपने मायके भी जाने नहीं दिया जा रहा। पति कहता है कि जाना है तो हमेशा के लिए चली जा। रोज घर से निकाल देने की धमकी मिलती है। मायके में भाभी के डर से भाई मुझे आने को नहीं कहता है और पति रोज-रोज और ज्यादा कमीना होता जा रहा है। बच्चे भी नहीं है। बोलती हूं कि डॉक्टर के पास जाओ तो वहां भी नहीं जाता। आईवीएफ के जरिए बच्चे के लिए कहती हूं तो वो बात भी नहीं मानता। मेरी जिंदगी ऐसी ही है। अपने बारे में किसी को कह नहीं पा रही थी, तो यहां आपलोगों से कह दिया। अब मायका बेगाना हुआ और ससुराल दुश्मन। मेरी जिंदगी की समस्या का क्या समाधान हो सकता है?

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