मेरे इक जानने वाला हैं जिन्हें मैं काफ़ी अरसे से जानता हूँ , माँ के कहने से कम उम्र ने शादी कर ली थी बच्चे हो गये मगर पूरी ज़िंदगी उन्हें मैंने कोई stable काम करते नहीं देखा ,
कई दफ़ा लोगों के कहने पे कई काम किया फ़ेल हो गये , छोटे मोटे काम किए मगर कोई ख़ास सक्सेस नहीं मिली , अपने सारे बच्चों की शादी भी सही उम्र में कर दी उन्होंने ,
उम्र का ज़्यादा हिस्सा ग़रीबी में निकाला , ससुराल से सालों ने मदद की , बाद में बच्चे बड़े हो गये अब वो कमा रहे हैं । देखने वाले उनके खानदान वाले सब हरामख़ोर कोई निकम्मा कोई कुछ कोई कुछ कहता है ।
इक दफ़ा की बात है मैं उनके घर पे था उनके बड़े बेटे ने उन्हें किसी बात पे बोला की “कमाते धमाते तो हो नहीं” बात पूरी नहीं हो पायी थी तब तक उसकी माँ ने खींच के तमाचा जड़ दिया
बोला तेरी ख़्वाहिश ज़्यादा है तो तू कमा पूरा कर और आइंदा ऊँची आवाज़ में बात न करना ।
उस औरत ने तमाम उम्र ख़ुद कभी उनसे शिकायत नहीं की न अपने बच्चों को कभी ऊँची आवाज़ में बात करने दी , हम लोगों से कहती थीं की कोशिश तो करते है मगर कभी इस आदमी को एहसास नहीं होने दिया कि वो ज़्यादा कमाता नहीं , जितना था उतने में गुज़ारा किया , हाथ भी फैलाए तो अपने भाइयों से, माँगा वो भी हक़ से (बेटी का हिस्सा होता है बाप के मरने के बाद जायदाद में कुछ नहीं मिलता अक्सर लड़की को )
बड़ी साबिर औरत हैं हंसमुख और अपने शौहर के साथ ऐसे रहती हैं जैसे अभी भी कपल हैं दोनों के दरमियाँ मोहब्बत दिखती है ।
कहानियाँ straight लाइन की तरह नहीं होती , दौलत ही सुकून का सबब हो ये ज़रूरी नहीं । उस औरत ने निभाई , और कभी शिकायत नहीं किया , मैंने देखा उसने जो पैमाने ग़रीबी में बना दिया उसे आज कल की मिडिल क्लास औरतें भी छू नहीं पायेंगी
तरबियत का जो मुज़ाहिरा उसने ग़ुरबत में किया उसे आज कल की सैटल औरतें नहीं कर पायेंगी ।
उस औरत के चेहरे में ग़ुरबत में भी जो सकून देखा है वो खोजने पे भी नहीं दिखता , उनके चेहरे के मुस्कुराहत को शुक्रन अल्लाह पढ़ा जा सकता है
उसे अपना हक़ अधिकार पता था उसे तरबियत मालूम है उसे निभाना मालूम है उसने बतौर माँ अपने बच्चों की शादी सही उम्र पे की ।
मैंने बहुत कुछ सीखा है उस औरत से और admire करता हूँ उन्हें और उन तमाम औरतों को भी जिनसे इस ज़िंदगी में मिला हूँ चाहे वो मेरी माँ हो, बहन हो, दोस्त टीचर कलीग हों, भाभियाँ हों और कई हैं जिनसे बेइंतहा नफ़रत भी करता हूँ ख़ास तौर पे वो जो अपने माँ बाप की इज़्ज़त नहीं करती उन्हें सरेआम जलील कर जाती हैं , रिश्तों का ऐहतराम नहीं करती । पढ़ाई और तरक़्क़ी के नाम पे नंगी हो जाती हैं ।
Comments
Post a Comment