डिप्रेशन

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एक और वहम दूर करना चाहता हूं कि डिप्रेशन सिर्फ अपनी सोच के गलत ढंग, और दूसरों के बुरे रवैयों का दिमाग पर बुरा असर ले लेने से होता है, ....
डिप्रेशन इसके अलावा तब भी होता है, जब आपकी खुराक में कोई गड़बड़ हो, और आपकी बॉडी आपके दिमाग तक सही तरह न्यूट्रिशन पहुँचाने में कमज़ोर साबित होने लगे...
.... एक दफा मैंने घरवालों की गैरमौजूदगी में वेट घटाने के लिये 6 दिन तक खाना ही नही खाया बल्कि फीकी चाय और पानी पीता रहा, और दूसरे तीसरे दिन सिर्फ एक वक्त कोई सब्ज़ी थोड़ी सी लेकर उबाल कर खा ली.... इतना करने के बाद मेरा वेट सात आठ किलो कम हो गया और मैं बहुत खुश हुआ.... लेकिन जब घरवाले लौटकर आये, तो अचानक मुझे उनको देखकर बहुत उलझन होने लगी, उन लोगों का नॉर्मल बिहेव मुझे बहुत चिढ़ महसूस कराने लगा, उन लोगों की आवाज़ें मुझे चुभने लगीं, घर से बाहर निकलता तो मैं ठीक हो जाता, लेकिन घर मे जाते ही जैसे मेरा दिमाग जकड़ जाता जबकि ऐसा कभी नही हुआ था.... दो तीन दिन तक मैं इसी तरह अजीब सी टेंशन में रहा फिर मैंने इसी अनजान चिढ़ में घरवालों को परेशान करने का फैसला किया और उनसे कहा कि मैंने अपने घर मे अक्सर किसी साये को चलते देखा है, 
इसके बाद मुझे होश आया जब अम्मी ने कहा "अब पता चला ? मैं तो हमेशा कहती थी कि जिन्न और आसेब इंसानों के बीच चलते फिरते रहते हैं, तब तुम मुझसे लड़ते थे कि जिन्नों की दुनिया अलग है, और वो इंसानों को नही दिख सकते, इंसानों पर जिन्न चढ़ने की बातों को तुम ढोंग कहते थे..."
.... अम्मी की ये बातें सुनकर मुझे होश आया कि मैं उन लोगों को परेशान करने के लिये ऐसी झूठी कहानियां आखिर क्यों बना रहा हूं, जिन बातों की मैं ही हमेशा मुख़ालिफ़त करता आया हूं.... अम्मी की बात और घरवालों की शक्लें देखकर मैं खुद पर बुरी तरह शर्मिंदा हो गया, कि ये मैंने क्या कर डाला, ...... ??? 
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.... उसके बाद कभी मेरे दिमाग की वैसी हालत नही हुई.... बाद में उस हद से ज़्यादा तनाव और अपनी बेवकूफाना हरकतों की वजह पर गौर करते हुए मुझे ध्यान आया कि उस तनाव के पहले मैंने कई दिन तक खाना न खाकर अपनी बॉडी को एक शॉक दे दिया था, बाद में पता चला कि दिमाग में अगर सोडियम या ग्लूकोस की भी कमी हो जाये तो दिमाग पर इंसान का काबू नही रहता, इसलिये इंसान को खाना पीना दुरुस्त रखना चाहिये.... 
.... मैंने तो वज़न घटाने के जुनून में वो बेवकूफी की थी, लेकिन कई लोगों के खाने पीने की आदतें ही ऐसी होती हैं कि वो आगे चलकर बॉडी फ़ंक्शनिंग को खराब कर देती हैं, जिससे दिमाग मे ख़ुशी महसूस कराने वाले हार्मोन का रिलीज़ होना कम होता जाता है, ... स्मोकिंग, ड्रग्स, शराब, जंक .... जिस्म में कोई भी नुकसानदेह चीज़ जाती रहेगी, वो आगे चलकर डिप्रेशन की वजह बन सकती है.... और ऐसा डिप्रेशन जो बॉडी फंक्शनिंग सही तरह न हो पाने से पैदा हुआ है, वो हमारे आपके समझाने बुझाने या काउंसलर से भी ठीक नही होगा, उस डिप्रेशन के लिये आपको प्रॉपर चेकअप करवा कर एंटी डिप्रेशन पिल्स जैसा कोई इलाज करवाना होगा...
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.... मेरी जितनी थोड़ी बहुत जानकारी है, उसकी बुनियाद पर आपको ये सलाह दूंगा, कि अपने जिस्म का, अपने खानेपीने का, अपनी लाइफस्टाइल का ख्याल रखिये कि हर चीज़ ऐसी हो जो आपकी सेहत के लिये अच्छी हो, इसके अलावा हंसी ख़ुशी को ज़्यादा इंजॉय कीजिये, और उदास करने वाली बातों को इस भरोसे के साथ अल्लाह के सुपुर्द कर दीजिये कि वो बेहतरीन कारसाज़ है, और इन मामलों का ऐसा कोई हल निकलेगा, जो हर किसी के हक में बेहतर होगा

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