कामकाजी महिला से शादी करना मेरे लिए अभिशाप बन गया। बचपन में मेरे माता पिता नहीं रहे इसलिए कम उम्र से ही मुझे काम करना पड़ा। प्राइवेट नौकरी करते करते मैंने अपनी बहनों की शादी की। घर बनाया और फिर अपनी शादी की। कामकाजी महिला से शादी करना मेरा खुद का ही फैसला था। मैंने बहुत खराब बचपन देखा और पैसों की बहुत तंगी झेली। वो सब यादकर आज भी मेरी रूह कांप जाती है। मैं नहीं चाहता था कि मेरे बच्चे उस तरह की तकलीफों से गुजरें इसलिए मैंने शादी के लिए सरकारी नौकरी कर रही एक लड़की को चुना।
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शादी के बाद मेरी बीवी मायके में ही रहने लगी और मैं अपने घर रहता था। त्योहार, गर्मी की छुट्टियों जैसे अवसर पर वो मेरे घर आती थी। इसी तरह से एक साल गुजर गया। फिर मुझे धीरे धीरे ससुराल वालों की साजिश समझ में आने लगी। मेरी बीवी के पिता पियक्कड़ थे। जीवन में जो भी उन्होंने कमाया था, सब पीने में उड़ाया था इसलिए उनके पास बचत नहीं थी। ससुराल वालों ने एक घर खरीदा और इसके लिए मुझसे बिना पूछे बीवी ने दस लाख का लोन लिया। मुझसे इस तरह से उन लोगों ने व्यवहार किया जैसे मैं कौन होता हूं बोलने वाला।
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मैंने भी उन सब बातों को इग्नोर किया और अपनी गृहस्थी को बचाता रहा। फिर धीरे-धीरे ससुराल वालों की बदतमीजी बढ़ती गई और मेरी बीवी उन लोगों का साथ देती रही। वो लोग कोई फंक्शन करते तो मुझे नहीं बुलाते। मेरे घर में कोई दुख की बात होती तो एक फोन तक नहीं करते। मेरे पास ये सब सहने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था। ज्यादा समस्या तब शुरू हुई जब मेरी बीवी का जीजा सप्ताह में दो तीन बार बीवी के घर जाने लगा और रात में बारह बजे तक बीवी के बेडरूम में गप्पें मारने लगा। मैं फोन करता तो पता चलता कि बीवी के बेडरूम में बैठा है।
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मेरी बीवी प्रेग्नेंट थी और उस दौर में भी उसके जीजा को कोई शरम नहीं थी। मेरा दिल यह सब देखकर जलकर राख होता रहा। साल 2021 में मेरी बेटी हुई और मेरे घर पर एक फंक्शन मैंने रखा। उसमें मैंने बीवी के जीजा को इनवाइट नहीं किया। बस इसी बात पर ससुराल वालों ने बवाल कर दिया। फंक्शन में मेरी सास भी आई थी और मेरी बहनें भी। सबके सामने मैं अपनी बीवी पर चिल्लाया। दिल में दबा गुबार निकलने लगा। मैंने सास को कहा कि आपका दामाद आधी रात तक मेरी बीवी के कमरे में क्यों रुका रहता है? मैंने बीवी को बोला कि तुम लोगों ने मिलकर मुझे ठगा है। मकान खरीदने के लिए तुमने लोन लिया और मुझसे पूछा तक नहीं। तुम लोगों की सोच छोटी है।
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मेरे चिल्लाने के बाद रात के एक बजे बीवी मेरी बेटी को लेकर ससुराल के लोगों के साथ चली गई और फिर लौटकर नहीं आई। वहां जाकर मुझे फोन पर बीवी बोली कि तुमको मेरे पैरेंट्स अब एक्सेप्ट नहीं करेंगे। उसने इल्जाम लगाया कि बेटी हुई इसी वजह से तुमने हम सबको रात में भगा दिया। इस घटना को तीन साल बीत चुके हैं। न बीवी लौटकर आई और न ही मैं उसे लेने गया। मेरी बेटी से वो वाट्सएप पर बात करा देती है, बस इतना ही रिश्ता बचा है। आगे क्या करूं, समझ नहीं आ रहा। मैं अपनी बेटी को नहीं खोना चाहता हूं। मेरी बेटी जब बड़ी होगी तब अपना हक मांगेगी तो उसके साथ भी वो लोग बुरा सुलूक करेंगे। मैं पिछले तीन साल से डिप्रेशन की दवा खा रहा हूं। मैंने वाइफ को यह बात बताई तो उसका जवाब था कि ये सब मुझको मत बताया करो।
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