homeopathy and it's importance

#INCREDIBLE_HOMEOPATHY_PART #2

#यूट्यूब वाले डॉक्टर्स क्यों कहते हैं दवाई का सेवन अपने होमियोपैथ के मश्वरे से ही करें?
#होमियोपैथी में लगभग 8000 दवाएं होती हैं, अगर सिर्फ़ #सरदर्द की बात करें तो इसकी लगभग 260 दवाएं पाई जाती हैं और #पेटदर्द की बात करें तो इसकी लगभग 240 दवाएं पाई जाती हैं. इसी तरह से अलग अलग बीमारियों की सैकड़ों दवाएं पाई जाती हैं, और सिर्फ़ एक मेडिसिन बहुत सारी बीमारियों के लिए पर्याप्त हो सकती है.
आपके लिए इनमें से कौनसी रेमेडी है इसका चुनाव कोई कुशल होमियोपैथ ही कर सकता है.
बात दरअसल यह है कि आपकी रेमेडी का चुनाव आपके #रोग, उसकी #स्थिति, रोग की #तीव्रता, #एक्यूट है या #क्रोनिक, #जेनेटिक स्थिति, आपकी शारीरिक #बनावट दुबले हैं या मोटे हैं, आप का रंग गोरा है या सांवला, #विनम्र हैं या #धूर्त, #लालची हैं या #परोपकारी, #मीठे के शौक़ीन हैं या #नमकीन पसंद है, वेजेटेरियन हैं या नॉन वेज पसन्द करते हैं. आपकी पसन्द नापसंद, व्यवहार, परिवार के प्रति समर्पित हैं या लापरवाह, इस तरह की सैकड़ों बातें मालूम करना पड़ सकती हैं.
बीमारी का #इतिहास जानना पड़ता है बचपन से लेकर बड़े होने तक की बीमारियों का हिसाब जानना पड़ता है, अगर सही दवाई से बीमारी ठीक न हुई हो तो #दोष (#Miasm) भी समझना पड़ते हैं.
इन सवालों के जवाब से जो डेटाबेस तैयार होता है उसमें भी कई दवाएं निकलकर आती हैं, होमियोपैथ अपनी सूझ बूझ से और इन दवाओं से एक या एक से अधिक दवाओं का चयन करता है.
सही रेमेडी का चयन होने के बाद भी इसकी सही पोटेंसी और रिपीटेशन निर्धारित करने में होमियोपैथ को बड़ी सूझ बूझ से काम लेना पड़ता है.
होमियोपैथ को इतने सारे डेटाबेस को प्रोसेस करने में 15 मिनट से लेकर कई घण्टे भी लग सकते हैं. वैसे तो इस समस्या का समाधान #होम्योपैथिक_रेपर्टरी_सॉफ़्टवेयर से भी हो जाता है लेकिन कभी कभी मैटेरिया मेडिका जैसी कई किताबों से सहायता लेना पड़ जाती है. यही #क्लासिक_होमियोपैथी कहलाती है.
आसान नहीं है होमियोपैथ होना, बहुत सब्र और शांति चाहिए इसके लिए.
आप सोचिए किसी बीमारी के इलाज के बारे में जब आप होमियोपैथ से सोशल मीडिया के माध्यम से पूछते हैं तो कितना मुश्किल होता है रेमेडी बताना.
हाँ कुछ दवाएं सिर्फ़ पैथोलॉजी के आधार पर भी दी जा सकती हैं.


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