कुदरत के उसूल

क़ुदरत के नियम!

कुदरत का पहला उसूल :
अगर खेत में बीज न डाले जाए तो कुदरत उसे घास फूस से भर देती है, ठीक उसी तरह से दिमाग में अगर पॉजिटिव विचार न भर जाए तो नेगेटिव थॉट्स अपनी जगह बना ही लेते हैं।

कुदरत का दूसरा उसूल :
जिसके पास जो होता है वह वही बांटता है , सुखी सुख बांटता है, दुखी दुख बांटता है, अहले इल्म इल्म बांटता है, गुमराह गुमराही बांटता है, डरपोक डर बांटता है।

क़ुदरत का तीसरा उसूल :
आपको ज़िंदगी में जो भी मिले उसे पचाना सीखो, क्योंकि खाना हज़म न होने पर बीमारियां बढ़ती है, पैसा ना हज़म होने पर शो ऑफ बढ़ता है, बात ना हज़म होने पर चुगली बढ़ती है, तारीफ ना हज़म होने पर घमंड बढ़ता है, तनक़ीद ना हज़म होने पर दुश्मनी बढ़ती है, राज़ ना हज़म होने पर खतरा बढ़ता है, दुख न पचने पर ना उम्मीदी बढ़ती है, सुख ना हज़म होने पाप बढ़ता है।

यहीं ज़िंदगी की हकीकत है।

( मुतरजम मनकुल)

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