शादी से पहले विचार

मैं 32 साल की हूं और बताना चाहती हूं कि एक बार शादी हो जाने के बाद अगर पति खराब निकला तो अलगाव और तलाक के अनुभवों से गुजरना कितना कष्टदायी होता है। मैं जब बीए पार्ट वन में थी तभी साल 2012 में मेरी शादी हो गई थी। अरेंज मैरिज थी लेकिन मेरी बात लड़के से कराई गई थी उसके बाद ही रिश्ता फाइनल हुआ था। लड़के की सिर्फ मां थी। सगाई के बाद करीब छह महीने से ज्यादा का गैप रहा और हम दोनों बात करते रहे। वो अभी बेरोजगार ही था लेकिन मेरे माता पिता ने उसकी जमीन और मकान देखकर यह रिश्ता आगे बढ़ाया था। शादी से पहले मैंने उसकी फोटो देखी थी और फिर कीपैड वाले छोटे फोन से उस पर बात हुई थी।
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जब शादी हुई तो उसके बाद यह अहसास हुआ कि फोटो तो इसी लड़के की थी लेकिन फोन पर किसी और ने बात की थी। शादी से पहले मैं जॉब करती थी। पति ने मुझे हर तरह की बंदिशों में रखना शुरू कर दिया। वो न तो खुद कुछ करता था और न ही करना चाहता था। खेती में भी रुचि नहीं लेता था। मैं ही एक शोरूम में काम करती थी और अपनी कमाई से ही घर चला रही थी। मुझे लगा कि मेरे साथ धोखा हुआ है। यह वो नहीं है जिससे मेरी बात कराई गई थी। मुझसे बात करने के लिए किसी और को लगाया गया था जिसने मुझसे अच्छी अच्छी बातें की और मेरी शादी फोटो वाले लड़के से कर दी गई।
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धोखा महसूस करने के बावजूद मैं शादी चलाने की कोशिश करती रही लेकिन पति के खराब बर्ताव से तंग आकर करीब तीन साल बाद मैं मायके चली आई। मैंने तलाक लेने का फैसला लिया। मैं खुद कमा रही थी और मेरी उम्र भी कम थी। बच्चे भी नहीं थे तो सोचा था नई जिंदगी की शुरुआत कर पाऊंगी। लेकिन जैसे ही मायके आई और तलाक का केस डाला वैसे ही समाज ने मेरे साथ बुरा बर्ताव शुरू कर दिया। नौकरी करने जाती थी तो वहां मुझे लोग अजीब नजर से देखते थे। मैं उनकी नजरों से तंग आ गई। मायके में भी बाहर निकलना लोगों ने मुश्किल कर दिया। मैंने परेशान होकर नौकरी छोड़ दी और घर से निकलना भी बंद कर दिया।
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तलाक का केस भी तारीख पर तारीख में फंसता गया और पिछले आठ साल से केस चल ही रहा है। मेरे अंदर जो भी जिंदगी जीने और कमाने की क्षमता थी, वो खत्म हो चुकी है। मैं इन आठ सालों में अपनी सारी क्षमता खो चुकी हूं। अब मैं पति से समझौता कर फिर ससुराल जाने की तैयारी कर रही हूं। अब मेरे पास इसके सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है। मायके में भी अब रह नहीं सकती क्योंकि यहां भी अब भाइयों को परेशानी हो रही है। 
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इस समाज ने हम औरतों के जीने के सारे रास्ते बंद कर रखे हैं। मैं जीने के लिए नया रास्ता खोज नहीं पाई और फिर से ससुराल लौटने की तैयारी में लगी हूं। मैं आप सबसे यही कहना चाहती हूं कि शादी का फैसला लेने से पहले जितना हो सके जांच परख लें। एक बार शादी हो गई तो वहां पति जीना हराम करेगा और अगर तलाक लिया तो समाज और रिश्तेदार जीने नहीं देंगे।

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