मैं उत्तराखंड से हूं और एक सरकारी कर्मचारी से शादी के तीन साल के भीतर ही मेरी जिंदगी को बर्बाद ही समझिए लेकिन मैं इस रिश्ते से अलग होने की हालत में भी नहीं हूं। मेरी शादी अरेंज मैरिज हुई थी। मेरे घर में पिता और भाई सरकारी नौकरी में हैं। मेरे पति भी सरकारी नौकरी में हैं। शादी से पहले उनके और मेरे बीच बातचीत हुई थी लेकिन उन्होंने आधा सच ही बताया था। शादी के बाद उनकी जिंदगी के बाकी सच से मेरा सामना हुआ। वो प्रोस्टीट्यूट्स के पास जाते थे और एक से तो इतना अटैच थे कि उसकी वजह से मेरे साथ मारपीट करने लगे थे। शराब भी बहुत पीते थे। उस कॉल गर्ल से फोन पर बात भी करते थे। खैर, मैं यह सब झेलकर भी गृहस्थी को आगे बढ़ाने में लगी। मैंने विरोध किया तो मुझे घर से निकल जाने को कहा। मैं चुप हो गई, आखिर कहां जाती? मायके में किसी को मैं परेशान नहीं करना चाहती थी।
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शादी के दो महीने बाद पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं। मैंने यह रिश्ता चलाया यह सोचकर कि चलो, गलती सबसे होती है, सुधरने का मौका मिलना चाहिए। फिर कुछ समय बाद मालूम हुआ कि उसको एसटीडी (से...ली ट्रांसमिटेड डिजीज) है। मैं एक बच्चे की मां बनी और डेढ़ साल बाद मेडिकल जांच में निकला कि पति को मेंटल डिसॉर्डर भी है। उसे बाइपोलर डिसॉर्डर डिटेक्ट हुआ। इसके बाद तो मुझे लगा कि इसको मैं पहले ही दिन छोड़ देती, वो मेरे लिए शायद अच्छा होता लेकिन अब पति को अब बुरे हालात में छोड़ना उसके साथ धोखा होगा। अगर ये बीमार नहीं होता तो इसको छोड़ देना ही सही रहता।
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मेरे पति के घर में सिर्फ उसके मां बाप हैं। एक देवर है जो पत्नी के साथ किसी और शहर में रहता है। अगर पति के मां बाप नहीं रहेंगे तो इसकी देखभाल कौन करेगा? अब तो इसकी दूसरी शादी भी नहीं हो सकती। यही सब सोचकर मैं इससे अलग नहीं हो पा रही हूं। मैं इसको तलाक नहीं देना चाहती क्योंकि मुझे गिल्ट हो जाएगा। मेरे दिल पर एक बोझ रहेगा कि ऐसी बीमार हालत में मैंने अपने पति को छोड़ दिया। मैं दूसरी शादी नहीं करना चाहती। लेकिन अब मैं अपने पति से प्यार नहीं करती। बस मेरा रोल इसकी जिंदगी में इतना है कि इसको इसकी दवाई समय से दूं और बाकी घर के काम कर दूं। मेरा बच्चा है, उसको पालने में लगी हूं। मेरे घरवालों को बस इतना पता है कि पति की दिमागी हालत ठीक नहीं। मैं मायके में कुछ नहीं बताती हूं, उनको परेशान नहीं करना चाहती क्योंकि मैं पति को छोड़ सकती नहीं और आगे किसी से मुझे शादी करनी नहीं। शादी जैसे रिश्ते से मेरा भरोसा उठ चुका है। सास और ससुर को भी दुख नहीं देना चाहती।
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मेरी समस्या मेरे अंदर का गुस्सा है। आज मेरे मन में बहुत ही गुस्सा भर चुका है। मैं ऐसे गिरे हुए इंसान के साथ रह रही हूं जो कॉल गर्ल की वजह से अपनी बीवी को पीटता था। इस इंसान ने मेरे मन और भरोसे को चकनाचूर कर दिया। मेरे अंदर जो गुस्सा है, मुझे खाता जा रहा है। इसको कैसे बाहर निकालूं, यह समझ में नहीं आ रहा। मुझे अपने गुस्से को निकालने के लिए समाधान चाहिए।
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