कुछ मां अपनी बेटियों की दुश्मन होती हैं, ऐसा क्यों है, नहीं मालूम लेकिन मेरे साथ ऐसा ही हुआ। बचपन से आज शादीशुदा जिंदगी जीने तक मां के बुरे साये ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा है। मां ने मेरे साथ बहुत भेदभाव किया। मैं पढ़ने में अच्छी थी लेकिन मुझे पढ़ने के लिए घर के पास के एक स्कूल में भेजा गया जबकि मेरे भाई को शहर के सबसे बेस्ट स्कूल में पढ़ने का मौका मिला। मुझे स्टडी में घर से ट्यूशन कोचिंग का कोई सपोर्ट नहीं जबकि भाई को वो सब मिला। मुझे बचपन से ही घर के काम और खाना बनाने में मां ने लगा दिया, यहां तक कि परीक्षा के दौरान भी मुझे खाना बनाना पड़ता था।
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बाहर दूसरों के सामने मां ऐसे बताती जैसे मेरा बहुत ख्याल रखती है लेकिन घर में मेरा बुरा हाल करके रखा था। स्कूल के अलावे कहीं भी बाहर आने जाने पर पाबंदी थी। मैं पढ़ाई में अच्छी थी लेकिन घर में रहते रहते दिमाग से कुंद हो गई। मेरे पापा और भाई के सामने मां हमेशा मेरी बुराई करती रही। पापा और भाई की नजरों में भी मेरे लिए प्यार और सम्मान नहीं रहा। मां को मेरी शादी की बहुत जल्दी थी और वो इच्छा भी उन्होंने पूरी कर ली। मैं अपने ससुराल तो आ गई लेकिन यहां भी मेरी मां का साया मेरा पीछा करता रहा। सिर्फ चेहरे बदल गए थे लेकिन ससुराल में भी मायके जैसा ही सलूक जारी रहा।
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मैं समझ नहीं पाती हूं कि मेरी क्या गलती थी जो मां ने मेरे साथ ऐसा किया? कभी मुझसे सीधे मुंह बात नहीं की। घर में मैंने इतना इमोशनल ट्रॉमा झेला कि मानसिक तौर पर कमजोर हो गई। अब ससुराल में भी सब समझते हैं कि मायके से कोई मेरा साथ नहीं देगा तो यहां भी मुझे दबाकर रखा जाता है। मेरे सीधेपन का सब फायदा उठाते हैं। मैं हर औरत में एक अच्छी मां को खोजने की कोशिश करती हूं। मेरी मां है लेकिन ऐसा लगता है कि मां की कमी है। फैमिली होकर भी लगता है कि मेरी फैमिली नहीं है। ससुराल हो या मायके, मुझे अपनापन नहीं लगता। इस वजह से मैं डिप्रेशन में जा रही हूं।
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बचपन में जो भी मैंने झेला है, चाहकर भी मैं उससे निकल नहीं पा रही, आगे नहीं बढ़ पा रही। मैं खुद को भी कोसती रहती हूं। सारी दुनिया बेगानी सी लगती है। कुछ ऐसा वैसा करने का भी ख्याल आता है लेकिन अभी उसका साहस नहीं कर पाती हूं। मुझसे लोग अपना उल्लू सीधा करते हैं और बाद में मुझे ही बुरा कहते हैं। मैं आप सबसे जानना चाहती हूं कि कोई इंसान अगर चालाक नहीं है तो क्या ये गुनाह है? मुझे बताइए कि मैं चालाक कैसे बनूं ताकि मैं भी खुद को दुनिया में जीने लायक बना सकूं। मां ने जो खराब अनुभव दिए हैं, उनसे कैसे बाहर निकलूं?
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