मेरे गुनाहों की लिस्ट बहुत लंबी है।

मैं 30 साल की हूं और अपने आपको बहुत गुनहगार मानती हूं और आपसे बताकर मन हल्का करना चाहती हूं। बहुत कोशिश करके देख लिया कि खुद में सुधार ला सकूं लेकिन नहीं ला पा रही हूं। मैं बदतमीज, जीवन के हर क्षेत्र में असफल और बेहद गुस्सैल लड़की हूं। घर में हम दो बहनें हैं। मैं जितनी नालायक हूं,मेरी बहन उतनी ही लायक और शांत है। मेरे पापा एक प्राइवेट वकील हैं, मम्मी घर सम्हालती हैं। माता पिता मेरी हरकतों की वजह से रोते हैं। बचपन से ही पढ़ाई में मन नहीं लगा। जैसे तैसे बारहवीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन में एक बार बुरी तरह से फेल हुई फिर भी एम ए तक की डिग्री ले ही ली। प्रतियोगी परीक्षा क्या पास करती जब मैं पढ़ती ही नहीं थी। पापा मुझे डॉक्टर बनाना चाहते थे लेकिन उनके सपनों का मैंने कचूमर निकाल दिया। 
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मैंने अपनी बदतमीजी से सबसे ज्यादा मां को रुलाया है। जब गुस्सा आता है तो मैं जुबान पर काबू नहीं रख पाती। एक बार फेसबुक पर शादीशुदा आदमी के चक्कर में पड़ गई और मेरी वजह से उसका तलाक हो गया। अब मेरी वजह से उसका बच्चा बिना मां के प्यार के जीता है। मैंने पैसों की चोरियां भी की हैं। मैं आलसी और निकम्मी हूं, इंसान हूं कि नहीं, मुझे भी पता नहीं। शादी के नाम से डर लगता है। घर में एक दो बार मेरी शादी की बात हुई लेकिन मेरे रवैए के कारण ही बात आगे नहीं बढ़ी।अगर लड़का मेरे स्वभाव का हुआ तो शादी नहीं चलेगी और अगर वो अच्छे स्वभाव का हुआ तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। उसके घरवाले भला मेरी बदतमीजी क्यों बर्दाश्त करेंगे। मारपीट होगी और जेल यात्रा भी हो सकती है। इसलिए फिलहाल शादी को तो मैं टाल ही रही हूं। 
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बेरोजगार हूं लेकिन मां बाप पर बोझ भी बनकर नहीं रहना चाहती हूं। अभी तक तय नहीं किया है कि आगे क्या करूंगी? न मेरा कोई दोस्त, न कोई प्रेमी और न कोई हमराज। न मैं अच्छी बेटी बन पाई, न बहन, न छात्रा, न प्रेमिका और यहां तक कि आज तक अच्छी इंसान भी नहीं बन पाई। मैने खुद को सुधारने के लिए महात्मा बुद्ध के उपदेशों का सहारा लिया और मेडिटेशन का भी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मेरी मनोचकित्सा भी हो चुकी है, दवाएं भी लेती हूं। डॉक्टर साहब ने कहा, इलाज लंबा चलेगा। रात में डरावने और घिनौने सपने और दिन में बेचैनी, ये सब है मेरी जिंदगी, एक दलदल जैसी। ईश्वर को धन्यवाद भी करती हूं और उनसे सहायता भी मांगती हूं लेकिन कर्म इतने नीच हैं कि कोई सहायता नहीं मिलती। हां, अपमान मिलता रहता है जिसकी वजह से मेरा आत्मविश्वास बिलकुल खत्म हो चुका है।
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जिस औलाद के कारण उसके मां बाप रोएं वो औलाद कितनी नालायक होगी और भगवान भी ऐसी औलाद की कोई प्रार्थना नहीं सुनते। मेरी ये तथाकथित आत्मकथा पढ़कर बताइए कि मुझे क्या करना चाहिए। मुझे सुझाव की बहुत आवश्यकता है। मैं अपनी वजह से अपने माता पिता के चेहरे पर गर्व देखना चाहती हूं। एक ही ज़िंदगी है उसे बर्बाद नहीं करना चाहती। मेरा मन बहुत अशांत रहता है। चाहती हूं कि शायद किसी की टिप्पणी या मार्गदर्शन से मुझे दिशा मिल जाय।

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