हमारी शादी को दस साल हो गए थे। कितने खुश थे हम दोनों। इसके बावजूद कि हमारी कोई संतान नहीं थी। एक दोस्त की तरह एक दूसरे की जान थे। कोई संतान नहीं तो क्या हुआ, हम दोनों तो हैं न एक दूसरे के लिए। हम दोनों एक दूसरे से इतना प्यार करते थे कि शायद ही इस दुनिया में किसी ने किया हो। अगर हम दोनों साथ हैं तो दुनिया को जैसे हम भूल जाते थे। लेकिन पता नहीं कहां से एक तूफान आया और हमारे इस प्यार को उड़ा ले गया।
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सारी गलती मेरी ही थी। हम दोनों ही जॉब करते थे। एक साल पहले मुझे शराब पीने की बुरी लत लग गई। मुझे मजा आने लगा था। शराब पीने में इतना मजा क्यों आता था, यह मुझे आज तक समझ नहीं आया। कुछ ज्यादा ही पीने लगा था। हर दिन पीता था। मुझे पता नहीं था कि मैं अपनी और बीवी की जिंदगी को बर्बाद करने में लगा था। अगर मैं होश में होता तो शायद उस तूफान को देख पाता जो उस दिन आया। मैं जॉब से दस दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया। मैंने इन दस दिनों में इतनी शराब पी कि जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
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आखिर मेरी बीवी कितना सहती। वो अपने मायके चली गई, वो भी मुझे बिना बताए। दो दिन बाद मैं उसे मनाने भी गया, वो भी नशे की हालत में। वहां मुझे मेरी बीवी से मिलने नहीं दिया गया। बाद में मेरी बीवी से कहा गया कि मैंने उसके घरवालों के साथ बदतमीजी की। तारीख पर तारीख उसके वापस लौटने की मिलती गई और मैं और ज्यादा पीने लगा। इस पीने की आदत ने मुझे जॉब से निकलवा दिया।अब बिना जॉब के किस मुंह से उसको मैं वापस लाने जाता।
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मैंने अपनी तकदीर को भगवान के हवाले कर दिया। जॉब के लिए कोशिश करता रहा। मुझे किसी ने सलाह दी कि बीवी को वापस लाने के लिए कोर्ट का सहारा लूं। मैंने वही किया लेकिन मेरे वकील ने पता नहीं केस फाइल में क्या लिखा कि उधर से बीवी ने मुझे तलाक का नोटिस दे दिया। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं? मेरे सोचने समझने की ताकत मेरे साथ नहीं थी। उसी दौरान मेरी जॉब लगी और मुझमें नई हिम्मत जागी। मैं कोर्ट की तारीख पर पहुंच गया।
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लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। जज ने हम दोनों के तलाक का फैसला दे दिया था। अब रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई। मुझे अब भी ये सब सपना सा लगता है। लगता है जैसे सुबह उठूंगा और ये बुरा सपना टूट जाएगा। मुझे तो जीने में बहुत दिक्कत हो रही है, पता नहीं वो मेरे बिना कैसे जी रही होगी? खैर, वो रह सकती है मेरे बिना भी, तभी इतना बड़ा फैसला लिया उसने. अब तो सिर्फ इस बात से खुश हूं कि वो खुश है मेरे बिना।
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पर मुझे जिंदगीभर इस बात का दुख रहेगा और भगवान मुझे कभी माफ नहीं करेगा कि मैंने एक लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी। मेरे और रेपिस्ट में शायद अब कोई अंतर ही नहीं है। रेपिस्ट को तो सजा मिलने के बाद आजादी मिल जाती है। पर मेरे केस में मेरी सजा कभी खत्म नहीं होगी। हर दिन जब आईना देखता हूं तो मेरे अंदर एक आदमी को देखता हूं जिसने एक बाप की प्यारी बिटिया की जिंदगी बर्बाद कर दी है।
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हमें भी बिटिया का शौक था। शायद भगवान ने इसलिए बिटिया नहीं दी। आज मैं इस शहर को छोड़कर जा रहा हूं। यहां अब वो यादें मुझे और रुलाती हैं। जा रहा हूं उसकी यादों को हमेशा केलिए यहां छोड़कर। अपनी इस कहानी से बस मैं ये बताना चाहता हूं कि अगर वो इस कहानी को कभी पढ़ेगी और मुझे कभी माफ कर सके तो प्लीज मुझे वो माफ कर दे। उससे और उसके घरवालों से मैं दिल से माफी चाहता हूं। हो सके तो वो मुझे माफी दे दे।
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उससे मैं यही बताना चाहता हूं कि दो साल बाद फिर मैं आऊंगा। अगर उसने मुझे इन दो सालों में माफ कर दिया तो उसके पास ही रुक जाऊंगा हमेशा के लिए। नहीं तो फिर हमेशा के लिए उसकी जिंदगी से चला जाऊंगा, बहुत दूर, शायद दुनिया से भी दूर।
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