स्ट्रेचर पर जनाज़ा है और फ़र्श पर दस्तरख़ान बिछा है यही दुनिया है,
यह यूं ही चलती रहेगी यहां कोई आपका इंतज़ार नहीं करेगा, दफ़नाने का भी नहीं।
आपके जाने पर कोई खाना नहीं छोड़ेगा और ना होने पर कोई जीना नहीं छोड़ेगा!
लिहाज़ा अपने लिए ख़ुद ही अ़मल कीजिए,
आपको क्या लगता है, आपके मरने के बाद आपके रिश्तेदार आपके दोस्त आप की औलाद और आपके बहन भाई क़ुरान पढ़ पढ़कर आपको बख्श़वा लेंगे।
आपकी औलाद आपके लिए क़ुरआन पढ़ेगी जो आज आपके कहने पर नमाज़ पढ़ने नहीं उठती ।
रिश्तेदार आपके लिए दुआ़ करेंगे जिनसे आपकी लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती
यह दोस्त आपके लिए फ़ातिहा पड़ेंगे जो दीन और इस्लाम की बातें करने पर आप का मज़ाक़ उड़ाते हैं।
यह बहन भाई आपके लिए सदक़ा खै़रात करेंगे जो ईद पर भी नहीं मिलते ।
ऐ भोले भाले इंसान ख़ुलूस के ज़माने गुज़र गए, क़यामत क़रीब है अफरा तफरी का दौर है..!!!
यहां लोग ज़िंदो को भूल बैठे हैं मरने के बाद तुझे कौन याद रखेगा
अपनी आखि़रत की फि़क्र खु़द करो अपने लिए खुद क़ुरआन पढ़ो नमाज़ पढ़ो और अपने हाथ से ख़ुद खै़रात, सदक़ा और ज़कात करके इस फानी दुनिया से रुख़सत हों।
यही अक़्लमंदी है,
अल्लाह मुझे और आप सबको हिदायत दे
खुदको अपने लिए कुछ वक्त दीजिए , संभालिए खुदको और समझाएं की आप केवल इस दुनिया के लिए नही आए , यहां अनगिनत परेशानियां और दुश्वारियां है।
इसी दहकती आग में हमे हर रोज जीना है और मरने के ख्याल से खुदको पाक साफ करते हुए उस तरफ बढ़ना है
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