हमारा पेट स्वस्थ है…?

 हमारा पेट स्वस्थ है…?


आजकल जिस प्रकार हमरा दैनिक जीवन हो गया है उसमे हमे अपने बदले हुए लाइफस्टाइल के चलते कई शारीरिक परिवर्तन नजर आ रहे हैं कुछ बदलाव तो इतने घातक नही प्रतीत होते हैं पर उनसे हमारी आयु और स्वास्थ में अनुपयुक्त परिवर्तन नजर आ रहे हैं लेकिन कुछ बदलाव हमारे लिए बहुत घातक है जिसको नजरंदाज करना आपको जल्द अस्पताल के बेड पर ले जा सकता है।

जब जब मानवीय रहन सहन में परिवर्तन हुए हैं तब तब मन , मस्तिष्क एव पेट पर गहरा प्रभाव पड़ा है, हमारा पेट कई हिस्सों में बटा हुआ है जिसमें अमाशय , लीवर , छोटी आंत, बड़ी आंत वा मलद्वार भी है।

हालांकि पेट में किसी भी मर्ज के पैदा होने से किडनी, मुत्राश्य, प्रजनन अंग, तथा त्वचा भी परभावित होती है।


चूंकि इस लेख का टाइटल "पेट " से संबंधित है तो कुछ सावधानियां रखनी चाहिए जिससे हमारे पेट को हेल्थी रखा जा सके।

सबसे पहले तो आप सभी को ज्ञात है कि हमे अपने जीवन में जो बदलाव हो रहे हैं उसी के चलते अपने खाने पीने में भी बदलाव करने चाहिएं यदि आपका काम बैठे रहने का है तो हमे हल्का खाना , ज्यादा फाइबर , और कार्ब को नियमित कर देना चाहिए।

दूसरी बात आपको एलोपैथी में पैन किलर का प्रयोग बिना किसी dr की सलाह के बिना बिलकुल नहीं करना चाहिए, इसी के साथ मेडिकल स्टोर से गैस , तेजाब , बदहजमी के नाम से मशहूर कैप्सूल जो एचसीएल को ट्रिगर करते हैं बिलकुल नहीं करना चाहिए यह दवाएं एक दो बार के लिए तो सही रहती हैं पर इसका नियमित सेवन आपको बहुत बड़ा नुकसान दे सकता है यदि आपने इनका सेवन बिना किसी dr की सलाह के किया है तो इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है ।


पेट की अनेक बीमारियों में जिसमे , लीवर सोयरासिस, लीवर इनलार्जमेंट, तिल्ली का बढ़ जाना, तेजाब बनना , पेशाब में जलन वी बदबू, चक्कर आना , सफर में उल्टी , बदहजमी इत्यादि में होम्योपैथी की बहुत अच्छी दवाइयां उपलब्ध हैं जिनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है पूरी तरह हर्बल दवा।

एक बीमारी को खत्म करने के लिए दूसरी बीमारी को लगाना बंद करें , सावधान रहें स्वस्थ रहे।

Comments