जिस प्रकार हमारे पूरे शरीर को मस्तिष्क द्वारा संचालित किया जाता है उसी प्रकार इच्छाओं को संचालित करने में भी मन – मस्तिष्क का योगदान होता है। यौन उत्तेजना, स्वपन दोष , स्नायु दौरबल्य, धवजभंग यह सभी चीजे मस्तिष्क का एक प्रोग्राम हैं।
जिस प्रकार यौन इच्छा की कमी एक बीमारी है उसी प्रकार यौन उत्तेजना भी एक बीमारी ही मानी जायेगी। जब मानव में यौन इच्छा की कमी हो जाती है तो उसमे तनाव , बेचनी इत्यादि पनप जाते हैं , उसका मन दुनिया में उस तरह नही लगता जिस प्रकार एक सामान्य इंसान का मन सभी कार्यों में लगता है । वह इसी सोच विचार में दुर्बल भी हो जाता है और कई लोगो की ठगी का शिकार भी हो जाए ऐसा मुमकिन है। उसी प्रकार जब मानव में यौन इच्छा की अधिकत हो जाती है तो वह अपराधी भी बन जाता है या अपनी इस उत्तेजना के कारण अपने हाथों अपने शरीर का शोषण कर लेता है , पर कभी कभी यह हिंसक व्यवहार उसके साथ - साथ दूसरे का भी जीवन बरबाद कर देता है।
हमे इस विषय में जानकारी हासिल करनी चाहिए और यदि हमारे अंदर कुछ इस प्रकार की कमियां हैं तो उसका इलाज करवाना पड़ेगा तभी आप में हम में समाज में बदलाव आएगा।
कई चिकित्सा पद्धति इसका बहुत अच्छा इलाज करती हैं, अगर किसी को बिना साइड इफेक्ट्स के इलाज करवाना है तो उसे होम्योपैथी चिकित्सा को अपनाना चाहिए।
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