Britishers को अपने जीवन में लगभग सभी पढ़ने वाले इंसानो ने थोड़ा बहुत जरूर पढ़ा होगा एक दौर ऐसा भी रहा है की दुनिया के २२% हिस्से पर इनका साम्राजयवाद स्थापित रहा है , मुख्यतः: इंग्लैंड के निवासी ही इस में सम्मिलित भी रहें हैं , ऐसा दिखाया जाता है यह लोग बहुत ही निरंकुश थे , इनके अंदर दया नहीं थी जबकि ऐसा सम्भव् ही नहीं है की एक पूरी कंट्री या बटालियन, कंपनी ही अत्याचारी हो , हमने राजा राम मोहन राय जी के बारे में भी पढ़ा है , शिक्षा के उथ्थान में अनेक ब्रिटिश लोगो ने उनका साथ दिया जब हम गंगाधर रॉव् जो झांसी के राजा थे उनके दौर में झांकते हैं तब जॉन नामक एक अंग्रेज ने झांसी की रानी की मदद की , हो सकता है की मामला ८०/२० का रहा हो पर यह सुनिश्चित करता है कि दुनिया में भले ही कोई कितना बड़ा भी तानाशाह बन जाये उसके खिलाफ आवाज उठ ही जाती है , आप आने वाले दिनों में जिनपिंग , पुतिन, इत्यादि का भी पतन देख सकते हैं , जनता शांति की भूखी होती है हमारे मस्तिष्क का शेप कुछ इस तरह का है अगर समाज में ज्यादा अशांति हो जाये या इसके परिवेश में अवरोध पनपने लगे तो यह इंसान को बता देता है की शांति की आवश्यकता पड़ रही है
, जिनके घरो में ज्यादा लड़ाई झगडे होते हैं वे लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं आगे चलकर यह तनाव का रूप लेकर इंसान को चिंता कि ओर ले जाता है , आपका काम है , जो लोग शांति कायम करने के लिए काम कर रहें है उनका समर्थन करें भले ही आपका समर्थन मौन हो , इस काम को करने वालों की संख्या कम हो , इससे आपको सुकून मिलेगा , कोई घ्रणात्मक प्रदर्शन आपको भले ही कुछ समय के लिए दुखी करदे पर इस का काल अल्प होता है , हो सके तो आजकल जो मनोरंजन के नाम पर नफरत व भेदभाव फ़ैलाने का काम होने लगा है उससे बचें , अपने हिसाब से मनोरंजन का अल्गोरिदम सेट करलें , हर हर उस वस्तु , वयक्ति को अपने परिवेश से बाहर कर दें जो आपको जरा भी नफरत परोस रहा है ,भले ही वह आपके मजहब का हो या परिवार का हो

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