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 अभी दो दिन पहले ही डॉ मजीद साहब Majid Khan 

[संकल्प होमियोपैथी क्लिनिक , प्रल्हाद नगर मेरठ ]

से मुलाकात हुई उनके वयवहार के बारे में फरमान हादी Farman Haadi साहब से सुना था कि काफी सुलझे हुए इंसान हैं , मुलाकात के बाद मैंने भी यही पाया उन्होंने मेरा बहुत एहतराम किया काफी वक़्त दिया मुझे सुना समझा मोटीवेट किया , एक अच्छे इंसान की खूबी यह भी होती है की वह सामने वाले की बात बड़ी तवज्जो से सुनता है , इस्लाम के पैगंबर साहब के बारे में भी हमने यह सुना है की जब कोई आप नबी सल्लल्लाहु अलय्हि वस्सल्लम के पास अपनी कोई बात बताने आता तो आप उसकी बात को बड़ी गौर से सुनते उसका मन हल्का करने के बाद उसको आगे के लिए मशवरा देते , यह बात बहुत विख्यात है की होमियोपैथ भी लोगो की बात को बहुत गौर से सुनते हैं उनके मर्ज से ज्यादा उनके मन मस्तिष्क में क्या चल रहा होता है इसपर ज्यादा ध्यान देकर उसके मर्ज को बहुत अच्छे तरीके से दूर किया जाता है | 


आज एक रिस्तेदार आये हुए थे , अक्सर लोग मुझसे घुले मिले रहते हैं क्योंकि मेरा भी वयवहार नरम है , मैं शख्ती को काम पसंद करता हु , हालाँकि पहले मैं बहुत कड़क मिजाज भी रहा हु पर इस कड़कपन ने मुझे कुछ खास फायदा नहीं पहुचाया , रिस्तेदार जी कहने लगे कि क्या हाल चाल हैं ? मैंने मुस्कुराते हुए कहा जी ठीक हूँ, उन्होंने कहा क्या काम कर रहे हो आजकल , मैंने कहा कुछ नहीं , उन्होंने अपने पैरों की तरफ इशारा करते हुए कहा की यह जो चप्पलें मैं पहन रहा हूँ इसकी M.R.P 125 रु है , इसको मैं तुझे 100 रु में दिलवा दूंगा एक तीन पहिये का ठेला ले लो और गली में फेरी करके बेको , मैंने कहा ठीक है मैं इसके बारे में सोचता हु और आपको अगली मुलाकात में बता दूंगा , उन्होंने आगे बढ़ते हुवे कहा की मेने अपने लड़के को स्कूल से निकाल लिया है क्योंकि पढ़ लिखने से कुछ फायदा नहीं , आज तू बेकार फिर रहा है जबकि तू काफी पढ़ा लिखा है , मेने तो अपने लड़के को बाइक सुधारने के काम पर लगा दिया है तुझसे अच्छा पैसा कमा रहा है , और तू पढ़लिखकर बेकार है , मैंने कहा हो सकता है आपकी बात सही हो.......


  मेरी नजरो में शिक्षा और धन का कोई तालमेल नहीं है , यह जरुरी नहीं की पढ़ा लिखा इंसान अनपढ़ या अधपढ़े इंसान से ज्यादा पैसा कमाए , बहुत से ऐसे लोग हैं जो पीएचडी हैं और रिक्से वाले से कहीं कम धन अर्जित करते हैं उनकी जरूरते भी कभी- कभी उनकी इनकम के अनुरूप ढल जाती हैं , और अंत में यह बताता चलूँ की मैंने आजतक किसीको किसी भी लिहाज से कमतर नहीं समझा मैंने किसी कम पढ़े लिखे इंसान को ऐसा मेहसूस नहीं होने दिया की वह किसी भी तरह मेरे बराबर नहीं है , नाही मैंने किसी जेंटलमेंन्ट के सामने खुदको उससे कमतर होने दिया | 


एजुकेशन हमें क्या देती है यह समझने में अभी बहुत जानना है | 

हर किसी से हमें सीखने को मिलता है , सीखना जरूर।।।

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