बदलता आचरण

 हम सब एक प्रचलित लिंग में ही रहना चाहते हैं या तो हम पुरुष बनना चाहते हैं या स्त्री ...

हमे इसके बीच में रहना पसंद नहीं है हालांकि देश दुनिया मजहब इनको किसी तरह भेदभाव से नही आंकता है।

हम जिस तरह खुद को पुरुष या मर्द बनते देखना चाहते हैं उसी प्रकार यदि हमे कोई संतान सुख है और वह भी पुल्लिंग में जन्मा है तो हम उसे अपने ही प्रतिबिम्म में देखना चाहते हैं ।

हालांकि यदि आपको कोई संतान सुख है और वह स्त्रीलिंग में जन्मा है तो आपको इतनी ज्यादा फिक्र नहीं होती यदि वह अपने लिंग के विपरीत आचरण करें पर हम चिंतित हो सकते हैं यदि हमारे पुत्र प्राप्ति हो और उसके आचरण से स्त्रितत्व झलके..!

कुछ लड़के बचपन से ही स्त्रियों जेसी तमाम गतिविधियों में देखे जाते हैं जिनमे कुछ बाते पाई जाती हैं जो उन्हें समाज में तो हास्य व्यंग का एक हिस्सा बना देते हैं उसके साथ साथ माता पिता को चिंता में भी डाल देते हैं।


अगर आप पाते हैं की आपका बेटा आपकी बेटी बन रहा है उसकी आवाज लडको की तरह न होकर लड़कियों की तरह है , उसके लक्षण आपको भाते नही है वह लडको के खेल न खेलकर लड़कियों के खेल खेलना शुरू कर रहा है उसकी शारीरिक और मानसिक बनावट लडको की तरह नही नजर आती लेकिन उसका जन्म पुरुष प्रजाति में ही हुआ है।

तो आपको आसन शब्दो में बताने की कोसीस की जा रही है कि उसमे टेस्टोरोन नामक हार्मोन की कमी है।

इस हार्मोन को दो तरीकों से बढ़ाया जा सकता है ।

पहला इलाज दूसरा कोई नहीं..


आयुर्वेद और होम्योपैथी ने इसका इलाज सबसे विश्वसनीय माना जाता है।

आयुर्वेद में अश्वगंधा पाउडर

होम्योपैथी में इसे विथानिया सोमनीफेरा (मदर टिंचर)

के नाम से जाना जाता है


(अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम विथानिया सोम्नीफेरा है और इसे विंटर चैरी और इंडियन गिनसेंग के नाम से जाना जाता है। यह आमतौर पर भारत और उत्तरी अफ्रीका में उगाया जाता है। अश्वगंधा एक तरह की औषधि है, जो कई तरह की लाइलाज बीमारियों में कारगर मानी गयी है।...)


उपरोक्त दोनो में से आप किसी भी का इस्तेमाल कर इस मर्ज से बचाव कर सकते हैं।






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