हमारा शरीर जिस प्रकार खाद्य पदार्थ ग्रहण करके हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है उसी प्रकार निष्कर्ण ( एक्सट्रैक्शन) करके हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है। अनेक बैक्टीरिया हमारे शरीर से निकलते हैं जिससे हमे शांति भरा जीवन मिलता है।
एक्सट्रैक्शन के मुख्य द्वार शरीर में इस प्रकार हैं जिसे हम उनके एक्सट्रैक से समझेंगे ताकि आसानी से समझा जा सके।
जैसे ;
मल
मूत्र
वीर्य
लार
पसीना
कान का मैल
आंखों की ग्लैंड से निकलने वाला सफेद पदार्थ
आंसू
छींक
बलगम
इत्यादि।
उपरोक्त सभी किसी न किसी ग्लैंड के माध्यम से निकलते हैं जो कई स्थिति में हमारे शरीर को सुचारू रूप से संचालन में मदद करते हैं।
आज हम बात करेंगे पसीने की , अक्सर गर्मियों में हमे ज्यादा पसीना आता है हालांकि कुछ कठिन कार्य करने पर शर्दी में भी पसीना आ जाता है , पसीने का असल काम होता है शरीर के तापमान को नियंत्रण में रखना
अगर बात की जाए पसीने में गंध की तो इसमें किसी प्रकार की गंध नही होती जो गंध हम अपने या किसी दूसरे के पसीने से महसूस करते हैं वह असल में बैक्टीरिया की दुर्गंध होती है बैक्टीरिया हमारे परिवेश में फैले हुए होते हैं और हमारे शरीर के संपर्क में आते हैं और मर जाते हैं तो उनकी गंध ही हमे महसूस होती है।
अगर कोई अपने पसीने की दुर्गंध से परेशान है तो वह होम्योपैथी चिकित्सा के जरिए इसका बिना किसी साइड इफेक्ट्स के समाधान कर सकता है।
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