~ आपने यह सब जरूर महसूस किया होगा की आपको बुखार हुआ और आपकी जबान कई दिनों तक कड़वी रही कमजोरी सी बनी रही।
जब बुखार होता है तब आपने ध्यान दिया होगा कि डॉक्टर हमें मुँह खोलने को कहते हैं और हमारी जीभ देखते हैं. बुखार में हमारा शरीर गर्म होता है. इसके कारण हमारे शरीर में पानी का ह्रास होता है और इस निर्जलीकरण के कारण हमारा मुँह सूखता है और जीभ के ऊपर एक परत जम जाती है जो हमारे स्वाद कलिकाओं को भोजन का स्वाद नहीं लेने देतीं. इसके कारण ही हमें किसी चीज़ का स्वाद मालूम नहीं होता.~
कई बार बुखार में ली गयीं एंटीबायोटिक्स भी मुँह का स्वाद बिगाड़ देती हैं और हमें स्वाद का पता नहीं चल पाता.
इसलिए बुखार को धीरे धीरे उतारें घबराएं नहीं , आपकी घबराहट के कारण एलोपैथी डॉक्टर को आपको ज्यादा एंटीबायोटिक देनी पड़ती है कभी कभी अज्ञानतावश भी डॉक्टर ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं लिख देते हैं कभी कभी मैने कुछ डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन इसे देखे हैं जिसमें 2 से अधिक टैबलेट एंटीबायोटिक लिखी होती हैं।
यह आपके शरीर को हानि पहुंचा सकते हैं भले ही यह प्रिस्क्रिप्शन आपके बुखार को 104 से 100 पर लाने में मात्र कुछ घंटे लें। आपके लीवर से जो एंजाइम रिलीज होती हैं वो बाधित हो जाते हैं ।
इसलिए आप बुखार को उतारने के लिए होम्योपैथी चिकित्सा अपनाने पर जरूर ध्यान दें।
आपका लीवर आपका ही है आपकी किडनी भी आपकी ही है इसको अधिक एंटीबायोटिक देकर कमजोर न बनाए
यह होम्योपैथी मेडिसिन आपके बुखार को धीरे धीरे कम करने में सहायक हैं।
ध्यान रहे -नजदीकी होम्योपैथी चिकित्स की सलाह जरूर लें।

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