बच्चों के मन में डर

 क्या आप जानते हो कि आप की तरह ही आपके बच्चे भी डिप्रेशन, तनाव एंजाइटी ,चिंता के शिकार हो सकते हैं जी हां आपके वही बच्चे जो खेलते रहते हैं आपके सामने आप उन्हें देख कर खुश होते हैं और आप उनके लिए कुछ करने के लिए दिन-ब-दिन हर रोज मोटिवेट होते रहते हैं , जी हां यह बात सच है कि आपके बच्चे भी इस आभासी दुनिया में आप ही की तरह जूझते हैं आपके चैलेंजस कुछ बड़े होते हैं लेकिन जब उनके चैलेंज उनके अनुकूल नहीं होते  तो वह भी तनाव का शिकार हो सकते हैं।

जरूरी नहीं कि सभी बच्चे तनावग्रस्त हो मगर अधिकतम आजकल इस प्रकार की शिकायतें मिल रही हैं जिसमें शिक्षा का स्तर पहले के मुकाबले  तब्दील हो चुका है।

अपने बच्चे को हाई लेवल की कुर्सी पर बैठाने के लिए उसके साथ अनेक प्रकार के जतन करते हैं जिसके कारण वह तनाव में चला जाता है।


आइए बच्चों के तनाव और उनके दुष्प्रभाव के बारे में बात करते हैं।

लेख को छोटा करने की कोशिश करेंगे और कुछ बातों का  जिक्र करेंगे जो आपको अपने बच्चों में मिले तो आप उनके तनाव को समझ सके।

अनिद्रा, भूखी कमी, चिड़चिड़ा मिजाज, रोज के खेल में रुचि का कम हो जाना  , टीचर या ट्यूटर क नाम आने पर सहम जाना , एग्जामिनेशन के डर से हार्टबीट बढ़ जाना राइटिंग का बिगड़ जाना , यह कुछ छोटे-मोटे लक्षण है जो हम आम बच्चों में भी देखते हैं मगर इसकी अधिक समय तक स्थिरता हमें सूचित करती हैं कि हम अपने बच्चों के विषय में कुछ सोचे।


बच्चों में पाई जाने वाली कुछ कमियां इस प्रकार है।


उनकी एक एंजाइटी स्टेट होती है उनके पास एग्जामिनेशन स्ट्रेस भी हमसे कहीं ज्यादा होता है वह पुअर स्टूडेंट्स कहलाने के बाद अधिक चिंतित रहने लगते हैं उनकी ग्रोथ रिट्रैटेड हो जाती है , उनके अंदर नींद बहुत कम या इस तरह की नींद जिससे वह डर के उठे उत्पन्न हो जाती है वह थके थके रहते हैं और उन्हें क्रॉनिक डायरिया भी हो सकता है जिसके कारण उनका डिफेंस मैकेनिज्म बिगड़ जाता है।


यह विकार 2 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चों में पाया जा सकता है इसलिए अपने बच्चों को लेकर लापरवाह ना हो।


उपचार,

होम्योपैथी में इस तरह के रोगों का बहुत अच्छा उपचार है और बहुत कम समय में यह सारे रोग जो बच्चे में पाए जाते हैं बिना किसी साइड इफेक्ट के ठीक किए जा सकते हैं इसलिए यदि आपको अपने बच्चों के लिए चिंता है तो आपके पास इसका हल भी है।

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