भाग 1
मैंने आपसे बहुत सारी बात छिपाई, उसमें से एक यह है कि मैं मल्टी - मैन बनना चाहता था। अर्थात जो बहुत सारे काम करके धन कमा सके , एक काम में सीमित न रहे ।
मुझसे अक्सर लोग पूछते रहते हैं आखिर आप क्या करना चाहते हैं मैं अक्सर उनके इस सवाल को शांत रहकर जवाब देता हूं और मन में सोचता हूं मैं बहुत कुछ करना चाहता हूं या यू कहें सब कुछ जो मुमकिन हो,
मुझे खुदती हुई सड़क में भी दिलचस्पी है और बनते हुए मकान में भी , मुझे आने वाले रॉकेट लॉन्चर में भी दिलचस्पी है और अल्ट्रासोनिक मिसाइल में भी , मुझे गीत संगीत भी मोह लेता है और खराब पड़ा फ्रिज कूलर एयर कंडीस्नर व लिकिज होता वाटर फिल्टर भी , मुझे शानदार डिश बनाने का भी शौक है और बदसूरत पड़े फोन को ठीक करने का रास्ता एवम तरकीब भी वयस्थ कर देती है, उपरोक्त कामों में मैने बहुत कामयाबी भी हासिल की है जिसके कारण मेरे जज्बे में और उछाल आया।
मैं बचपन से ही नौकरी को बिल्कुल पसंद नहीं करता था नौकरी का नाम सुनते ही मुझे एंजाइटी होती थी ।
जब मैं सफर करते हुए बड़े-बड़े फैक्ट्री और कारखानों को देखता था और उन में काम कर रहे लोगों को जो बहुत सतर्कता से और आदेश अनुसार कार्य कर रहे होते थे उनके जीवन को देखकर मुझे बहुत ज्यादा चिंता हुआ करती थी ।
मेरा मन बेचैन था कि पढ़ लिखकर में इस तरह के कारखाने में काम किस प्रकार कर पाऊंगा हालांकि मैंने तकरीबन 8 साल इसी तरह की एक फैक्ट्री में काम भी किया है पर उसमें मैं अकेला था पूरी फैक्ट्री मेरे ऊपर ही थी , मैं जो चाहता था उसमें करता था मुझे ऑर्डर देने के लिए कम मुंह और हाथ थे जो मुझे इशारा करते हैं और मुझे मेरे मर्जी से मोड़ दे।
To be continue....
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