बिगड़ता स्वास्थ!
देश कहें या दुनिया सभी अपने स्वास्थ को लेकर बहुत चिंतित नजर आते हैं सब अपने टैक्स के पैसे को बेहतर स्वास्थ्य के रूप में बदलते देखना चाहते हैं टैक्स के पैसे से सरकारी अस्पताल ही नही बनते बल्कि इससे नई नई शोध भी होती हैं जो पूंजीपतियों के इलाज में भी मुख्य भूमिका निभाती हैं और अनेक शोधकर्ता भी अपनी जीविकोपार्जन करते हैं।
जिस प्रकार भारत को देखा जाता है कि एक उत्तर प्रदेश में ही 25 करोड़ जनसंख्या है जिसमे तकरीबन 15 करोड़ लोग मुफ्त रासन ग्रहण कर रहे हैं जिससे इस बड़े वर्ग की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है , यदि किसी सरकारी या चैरिटेबल ट्रस्ट के अस्पताल में मुफ्त जांच होनी सुरु हो जाये तो यह श्रमिक वर्ग के लिए बहुत बड़ी सेवा होगी और उनके आर्थिक बोझ को कम करने में सहायक भी होगी।
सवास्थ को लेकर केंद्र सरकारों द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जाती हैं जिनका प्रचार करना जितना सुगम है धरातल पर वह उतनी ही जटलता से लागू होती प्रतीत हो रही हैं ।
अशिक्षा एक महत्त्वपूर्ण योगदान निभाता है आपकी जागरूकता आपको कम बीमार होने देती है उसी के साथ साथ आपके बीमार होने पर त्वरित अपडेट के बाद इलाज की और आपकी चेतना को विकसित करती है , कोई व्यक्ति बीमार होने की इच्छा नही रखता परन्तु बीमारी किसी मिट्टी की चट्टान को या किसी बहते समुंदर को नही होगी , बीमारी एक सजीव प्राणी को ही होती है जिसमे सबसे पहले मनुष्य ही इसका घर बनता है , जो लोग बीमार हैं उन्हें भी मृत्यु को चखना है और जो बीमार नही है उन्हें भी इस लोक को छोड़कर जाना होगा।
मन मे अपनी बीमारी के प्रति ज्यादा विचार न बनने दें हर बीमारी का इलाज किया जा सकता है और लोग ठीक नही होते ऐसे मिथ्य से बचे रहें।
यदि आप बेहतर सवास्थ सेवाएं सुनिश्चित करना चाहते हैं तो अच्छे लोगों को चुने ,उनकी संसद एवं विधानसभा में भेजें उनसे आप मांग करें , आप के दिये टैक्स से 21 लाख करोड़ रुपये हर साल सरकार को कमाई होती है जिसमे 6 लाख करोड़ रुपये राज्य सरकारों को दिया जाता है , हो सकता है आकंड़े ऊपर नीचे हों पर आपको जागरूक करने के लिए यह काफी है।
इस बार फर्क साफ है और गर्मी ठंडी के चक्कर में न पड़े ,सीधे वोट देने का काम करें।
Comments
Post a Comment