मां का माँ बन जाना

सबका अपनी अपनी मां से प्यार करने का अंदाज अलग अलग होता है।

 कोई किसी खास तरह से मोहब्बत करता है तो कोई दूसरी तरह से , कोई अपनी मां के नाम से घर का नाम रखता है तो कोई अपनी नई गाड़ी का स्वागत अपनी मां के हाथों से करवाता है। 

यह बात भी सत्य है कि मां को ज्यादा प्यार बेटियां करती हैं बेटे उनसे इस प्यार में पिछड़े हुए हैं , अक्सर अपनी ससुराल से फोन करके उनके हाल चाल पूछती रहती हैं ,माँ भी हर बार वही सवाल करती रहती हैं क्या पकाया, क्या पहना, कंहा गई , नवासे नवासी की तबियत कैसी है।
 उनकी ज्यादातर बातों के टॉपिक यही होते हैं बस वह एक दूसरे की आवाज को सुनकर मन को शांत करती रहती है एक औलाद का माँ से दूर जाकर किसी अनजान घर मे बस जाना इसका एहसास एक मर्द कभी नही कर पायेगा हालांकि मर्द की सवेंदनाये रहती हैं  ।

 यह बात साफ हो जानी चाहिए कि मां अपने बच्चों से एक बराबर प्यार करती हैं उनके प्यार का तरीका एक समान होता है ।
सभी मां के दिल अपने सभी बच्चों के लिए एक समान धड़कता है , यह साफ कोरा असत्य है कि मां एक बच्चे को अधिक तो एक को कम प्यार करती है।

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