मां के हाथ का खाना और भ्रम
मैंने यह देखा है कि लोग अक्सर अपने गांव या पैतृक घर में जाकर ग्रामीण क्षेत्र में बने हुए चूल्हे जिनमें लकड़ी एवं गोबर के कंडे इस्तेमाल होते हैं उनका खाना खाते हुए अपनी पिक्चर शेयर करते हैं और लिखते हैं मां के हाथों के खाने का स्वाद... अधिकतर मैंने पाया है आजकल माओ ने खाना बनाना कम कर दिया है और अधिकतर घरों में चाहे शहर हो या गांव बहन ही खाना बनाती हैं इसलिए हमें यह कहना चाहिए की बहनों के हाथों का स्वाद मां का सम्मान इस से कम नहीं होगा क्योंकि बेटियां मां की परछाइयां होती हैं।
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