कैसे बचें बड़ी बीमारियों से?

Diagnosis= बीमारी ( मर्ज ) की पहचान,

किसी भी मर्ज का डाइग्नोस् होना बहुत जरूरी है आप अधिकतर पड़ोस के क्लिनिक पर जाते हैं अपनी समस्या बताते हैं और प्रैक्टिसनर आपकी बात सुनता है और जनरल डाइग्नोस् बना देता है और उसको पर्चे पर भी नही लिखता , पर्चे पर केवल आपका नाम और उम्र होती है जो काफी नही होता, उसके बाद  आपको कुछ मेडिकल ट्रीटमेंट दे देता है ,कभी- कभी आपका इस तरह अपना डाइग्नोस् बनवाना भारी भी पड़ सकता है यंहा मकसद किसी को डराना नही है बस जागरूक करना है , आपने देखा होगा  अधिकतर एलोपैथी का डॉक्टर ही आपको टेस्ट , MRI , सिटी स्कैन लिखता है बाकी पद्धति के चिकित्स उन पुराने टेस्ट पर ही अपना ट्रीटमेंट दे देते हैं और बहुत से मरीजों को लाभ भी मिलता है , समय पर यदि आपका डाइग्नोस् हो जाता है तो आप बड़ी से बड़ी बीमारी को उपचारित करवा सकते हैं इएलिये अगर आपको लगातार बीमारी परेशान करती है तो आप उसका डाइग्नोस् जरूर करवाये पड़ोस के क्लीनिक से जनरल इन्फेक्शन की दवाई न लेते रहे बहुत सी टैबलेट ऐसी होती हैं जिनकी बारम्बारता आपको अन्य बीमारियों में भी घेर सकती हैं कुछ दवाई के साइड इफेक्ट सीवियर नही होते हैं पर बिना किसी अनुभवी डॉक्टर की सलाह पर कुछ दवाइयां आपको अधिक बीमार कर सकती हैं जबिक आप ठीक होना चाहते हैं, मेरा मकसद किसी लोकल डॉ के खिलाफ कोई मुहिम छेड़ना नही है बहुत बार इस तरह के डॉ आपकी जान भी बचा लेते हैं ।
पर हर किसी को डाइग्नोस् बनाना नही आता जो आपके लिए समस्या भी  बन सकता है, कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिनके इलाज के लिए आप अपने फैमिली डॉ से भले ही मिल लें पर सही तरीके पर उसका इलाज उसके स्पेसलिस्ट से ही करवाये भले ही छोटी ही बीमारी हो , अगर कोई बीमारी बार बार रिपीट होती है तो जाहिर है अब आप नजरअंदाज न करें और उसके लिए डाइग्नोस् की अति आवश्यकता है।
खुदके डॉ न बने रहने दें , जिसका काम उसी को साझे , दूसरी बात अपने मर्ज को ज्यादा गूगल न करें नाही यूट्यूब पर जाकर देखें वँहा छोटी छोटी बीमारियों के बड़े बड़े इलाज और बड़ी बड़ी बीमारी के छोटे छोटे इलाज बताये गए हैं।

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