बीमारी , अभिशाप व निवारण

हालाँकि हमे समाज मे रहना है, जीना है अपने जीवन को यंही प्रारम्भ करना है और समाप्ति भी इसी समाज के अंदर ही व्याप्त है।
फिर भी हमे समाज की आलोचना करना , इसकी कुछ कुरीतियों पर आघात करना और कुछ पुराने बने उसूलो ,कानूनों व परम्पराओ पर धारदार जबान से मजम्मत करना पड़ता है, शायद यह आदत या मजबूरी बन चुकी है इस क्रिया को हम आसान बोली में " जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं" भी कह देते हैं यह बात पूरी तरह से सही है भी  या नही इसका हर अलग इंसान के लिए अलग अर्थ है।
फिर भी हम समाज से अनेक फायदे उठाने के साथ-साथ इसकी चुभती हुई अनेक प्रथाओं व चलन को मान्यता दे देते हैं, भले ही मजबूरी में ही पर यह लगातार क्रियान्वयन में है।

महिलाओं व लड़कियों के लिए समाज सदैव विपरीत दिशा में ही चलता प्रतीत हुआ है या यूं कहें कि स्त्री भावात्मक रूप से काफी संवेदनशील होती है , एक साधारण सी घटना भी स्त्री के लिए एक गंभीर रूप धारण कर सकती है, स्त्रियों की पसंद अक्सर पुरुषों को खटकती आई हैं , शायद पुरुषों का मस्तिष्क स्त्रियों की भांति शार्प नही सोच पाता, अधिकतर क्राइम ,अपराध, व घिनोने कृतों में स्त्रियों की भागीदारी कम ही प्रतीत होती हैं ,हम इसे अलंकारित करके यूँ भी कह सकते हैं कि संसार की शांति स्त्रियों के नरम रुख में निहित है।
भारत में आजादी से पहले जो इतिहास लिखित है उसमें बहुत से क्रूर शाशकों ने भारत में दखल दिया पर इन क्रूरतापूर्ण कार्यो में महिलाओं की भागीदारी शून्य है, जबकि इसके विपरीत साहस में स्त्रियों ने पुरुषों के कदम से एक कदम आगे बढ़ा कर देश को मुक्त करवाया , मैं केवल भरतीय महिलाओं की ही बात करूंगा तो यह उचित नही होगा और अन्य महाद्वीपिय महिलाओं के साथ अन्याय होगा इसी प्रकार हम अंग्रेज, डच, फ्रांसीसी उपनिवेश करने वालो एवं बाद में भारत में अपना राजनीतिक लक्ष्य पूरा करने वालों के बीच से भी किसी महिला का नाम प्रकाश में नही पाते।

"महिलाओं के लिए कुछ समस्याएं सदैव एक समान रही हैं जिसमे महत्वपूर्ण स्थान है इनके द्वारा पुरुषों को खुश रखना "

महिलाएं पुरुषों को खुस रखने के लिए अनेक त्याग देती हैं एक खुशहाल परिवार की हर कड़ी को मजबूत बनाने में महिलाओं से अधिक किसी का योगदान नही होता हालांकि पुरुष भी अपना कर्तव्य भलीभांति पूरा करते हैं पर जो त्याग, स्थिरता स्त्रियां बनाये रखती हैं वह पुरुष के लिए काफी कठिन कार्य हो जाता है।
बहुत सी सावधानियां ऐसी हैं  यदि इनको अनदेखा कर दिया जाय तो पुरुषों के लिए स्त्री केवल एक बेजान खिलौना बन कर रह जाती हैं।
यदि कोई स्त्री या लड़की बीमार पड़ रही है और यह बीमारी लगातार जारी है तो दोनों के लिए यह लाज़मी है कि वह इस बीमारी को जल्द से जल्द उपचारीय पद्धति में तेजी लाकर स्वस्थ होने की कोशिश करे हालांकि अधिकतर बीमारियों में हमेशा स्वम की लापरवाही मुख्य बिंदु होती है।
हर मर्ज को ठीक किया जा सकता है यदि उसपर ध्यान दिया जाय, दुनिया में अनेक पद्धत्तियाँ है जिसमे होम्योपैथी बहुत किफायती और सस्ती पद्धत्ति है।
मुख्यतः महिलाओं की अनेक समस्याओं का इलाज होम्योपैथी के द्वारा किया जाता है जिसमें काफी सफलता बिना किसी ज्यादा रकम  खर्च किये मिल गया है।
यदि कोई स्त्री बीमार पड़ गई है और वह अपनी बीमारी के प्रति लापरवाह है मसलन वह पूर्ण रूप से इलाज नही करवा रही या बेपरहेज़ हो गई है या किसी अन्य कारण से वह इलाज में सुस्ती बरत रही है तो यह अंदेशा जताया जाता है कि उसका पति उसके अंदर दिलचस्पी लेना बंद करदे या बार बार मर्ज के सामने आ जाने से नाराज रहने लगे और उस स्त्री को पत्नि न मानकर पैसा खर्च व समय व्यर्थ करने वाली मानने लगे , यह स्थिति एक महिला के साथ साथ पूरे परिवार के लिए घातक हो सकती हैं हालांकि अनेक पति अपनी पत्नियो का हर सम्भव ख्याल रखते हैं पर यह छोटी सी बात एक परिवार में बहुत बड़ा फेरबदल कर सकती हैं इसलिये महिलाओं को चाहिए कि वह अपने छोटे से मरज को भी लापरवाही के चलते अनदेखा न करें यही पौधा एक दिन वृक्ष बन जाता है।
इसी प्रकार ,इस समाज में खासकर यदि कोई लड़की बीमार है और वह अभी शादीशुदा नही है तो उसको अपने मर्ज का मुजाहिरा नही करना चाहिए हो सके तो छुप छुपाकर इलाज जारी रखे कोई मर्ज ऐसा नहीं है कि जिसका इलाज न हो सके होम्योपैथी एलोपैथी व आयुर्वेद भी सकारात्मक पद्धति हैं इनमें बड़े से बड़े मर्ज को खत्म करने की गीजा है....
यदि आपके चाहने वाले प्रेमी को आप हमेशा यही खबर सुनायेगीं की आज यह बीमारी है कल वह बीमारी है तो उसके अंदर आपके प्रति एक अलग भाव पैदा हो सकता है।
या यदि आपका प्रेमी नही है तो आपके आने वाले रिश्तों पर इसका बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है , समाज मे रह रहे असामाजिक तत्वों के माध्यम से अनेक खबरें गढ़ ली जाती हैं या जो बात छूपाने की है उसे जगजाहिर कर दिया जाता है जो आपके आने वाले जीवन में समस्या व चुनोतियाँ बन जाता है।
बीमार पड़ जाना कोई बुरी बात नहीं है पर इलाज में कोताही व लापरवाही बरतने वाले लोगों के लिए एक ही शब्द है कि " नाक की नथ दिखाने के लिए नाक ही फोड़ ली"
अर्थात प्रेमी के या मंगेतर केेका अट्रेक्शन पाने के लिए खुदको ही किसी के लायक नहीं छोड़ा ।

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