मेरी गरीबी

गरीबी गरीबी यह मेरी गरीबी।

 खाने को पानी ना पीने को प्यासा 
लुओं की लहरों में ठंडी की आशा 
तेरी छांव में हम सदा पलते आए 
तेरी बाहों में हम मचल भी ना पाए
 गरीबी गरीबी यह मेरी गरीबी 


नहीं जलता चूल्हा तेरी याद में 
तू आती नहीं है  कभी बाद में 
तेरा आना चुराता है निंदिया हमारी 
मेरी सांसो को तू कभी ना सताना 
गरीबी गरीबी यह मेरी गरीबी 


कभी ना कहें हम तू सौतन से प्यारी
 कभी ना कहें हम तू बन जा दुलारी 
तेरे आ जाने से किलसते हैं बादल 
तेरी छांव में बिलखते हैं बालक 
गरीबी गरीबी यह मेरी गरीबी



सईद जावेद अहमद

Comments