कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनको लेकर इंसान सलाह का मोहताज हो ही जाता है, कभी कभी वह अपने फैसले अकेले लेकर ज्यादा दुखी हो जाता है और फिर खुदको कोसता है , जब वह बहुत से लोगो की सलाह ले लेता है तो उसको यह फैसला निजी नही लगता उसे लगता है कि एक मस्तिष्क के मुकाबले अनेक मस्तिष्क एक बेहतर फैसला कर लेते हैं।
नीचे लिखा वाक्यांश एक मशवरा भी है और निजी जीवन में एक बदलाव के बारे में आने वाले अनेक बदलावों की ओर एक नया कदम।
एक पढ़ा लिखा व्यक्ति सदैव यह उम्मीद रखता है कि उसे जीविका के लिए एक अच्छा कार्य मिल जाय, उसके लिए वह सरकारी व गैर सरकारी अवसरों को तलाशने में लगा रहता है पर कभी कभी वह अधिक मेहनत करके भी या जितना उसका सामर्थ्य है उसके अनुसार अपना सो फीसद देकर भी खाली हाँथ रह जाता है।
उसको काम मिलना बहुत दुविधाओं से भर जाता है हर कदम पर उसको तानाकशी का सामना करना पड़ता है जो उसके जीवन मे अवसाद घोलने का कार्य तेजी से करते हैं इस प्लेटफॉर्म पर भी हजारों लोग ऐसे होंगे जिनके साथ यह सब हुआ होता है।
हालांकि सवाल बहुत बड़ा लेख लिखने के बाद ही किया जा सकता है पर यंहा बड़ा लेख लिखने के बाद आपके सवालों का जवाब मुश्किल ही मिलता है।
नीचे पंक्तियों में कुछ सवाल हैं जिनसे बहुत से लोगो का संबंध हो सकता है कुछ का तजरबा भी हो सकता है व किसी के लिए यह केवल मजाक या नाकारापन।
1). क्या पढ़े लिखे इंसान को केवल अपने ही क्षेत्र में रोजगार तलाशना चाहिए
2) क्या सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लोगो को लंबे समय तक उसके लिए संघर्ष करते रहना चाहिए
3) क्या किसी गैर सरकारी नोकरी को लेकर उसके साथ सरकारी नौकरी की तैयारी करनी चाहिए और यह कितनी आसान होती है उसकी भी व्याख्या।
4) क्या कोई भी काम छोटा नही होता या अपने ज्ञान व डिग्री के आधार पर ही काम करना चाहिए क्योंकि आपकी प्राप्त शिक्षा आपकी कौम व पीढ़ी के लिए एक सिंबल होती है
5) समय पर जो मिल जाय उसको अपना लेना चाहिए और अपने गोल पर सब्र करके जो है उसे अख्तियार कर लेना ही बुद्धिमानी है
6) अपने क्षेत्र में यदि कामयाबी नही मिल पा रही है तो क्षेत्र को बदलने के विषय मे सोचना चाहिए , मसलन कोई इंजीनियरिंग का स्टूडेंट है यदि उसको हॉस्पिटल में कोई जॉब मिल रही है तो उसको कर लेनी चाहिए
बाकी सवालात शायद इनका ही उल्लेख पेश करें हो सके तो आप इसके विषय मे कुछ राय पेश करें,
धन्यवाद/ शुक्रिया
Comments
Post a Comment