मुझे तजुर्बात* ( एक्सपेरिंस) लिखने का बहुत सोक* है ।
आज जब मैं खाना खाकर लेटा तो दिमाग को राहत मिली और उसने पूरे शरीर मे आराम को दौड़ा दिया और नींद आ गईं।
शायद 1 घण्टे ही सो पाया था कि एक जानने वाले भाई की कॉल आ गई जो मुझसे मेरे भाई के बारे में मालूम कर रहा था कि कंहा है जफर ( वेल्डर) ..?, मैं यह जनता हूँ कि वह घर पर नही है इसलिए नींद में ही बोल दिया "घर पर तो नही है, कंही गया होगा" असल मे मेरे भाई का वेल्डिंग का काम है , और कुछ दिन पहले उसने एक दुकान किराया पर ली थी और फिर खाली करदी पर उसपर मेरा नम्बर लिखा हुआ है , उस जानने वाले का नाम गुलज़ार अब्बासी है , गुलज़ार साहब ने कहा कि यार एक भाई है उसकी bullet में वेल्डिंग होना है गियर नही डाल पा रहे" , जफर से बोल की करदेगा,!
अब लोकडौन में कैसे करें लाइट की जरूरत है मशीन तो घर मे है पर गली में आने पर बाहरी लोगों से गली वाले नाराज न हो जाएं, ?
मैने कहा कि नही है जफर... उधर से फ़ोन कट गया।
मैं उठा , क्योंकि नींद जा चुकी थी, फिर मुझे ख्याल आया पता नहीं कोन होगा बुलेट पर..? कहीं कोई महिला, बीमार , परेशान या कोई लंबे सफर का मुसाफिर भी हो सकता है..। क्या दिक्कत आ रही होगी उसे , दुकानें भी खुल रही होंगी या नही..?
आधा घंटा बीत गया मेने उसी नम्बर पर कॉल बैक किया उस तरफ से फोन उठा और मैने पूछा " हो गया आपका वेल्डिंग..? उधर से देहाती आवाज आई जिसमे हरियाणे की झलक देखने को मिली, जवाब मिला नही हुआ भाई,.... मेने कहा मैं एक्सपर्ट तो नही हूँ वेल्डिंग में पर मैं कर सकता हूँ आप आ जाओ,वह कुछ ही देर में आ गया , मैंने उसकी बाइक अंदर गली में पार्क करवा ली, कुछ लंबे वायर का इंतेजाम किया अपने मीटर से वायर कनेक्ट किया और बहुत उलझन भरी जगह वेल्ड करना था......... जो एक इलेक्ट्रॉनिक वेल्डिंग रॉड के लिए मुस्किल होता हैं वह बॉडी पर टच होती है तो नई बाइक पर पेंट डेमेज भी हो जाता है।
मैंने वेल्ड करने में एहतियात बरतते हुए ठीक ठाक या यूं कहें मजबूत कर दिया जो अब जल्द न टूटने वाला था।
वो बन्दा समझ चुका था कि मैं वेल्डर तो हुँ पर परफेक्ट नही , इसलिए उसने सवाल कर दिया कि भाई कहां हैं आपका, मैने मजाकिया लहजे में कह दिया कि वह परवाशी बन्दा है फस गया होगा इस लोकडौन मे कहीं , PM जी ने कहा है जो जंहा है वहीं रहे""...
उस बन्दे ने फोरन उल्टी सीधी बाते करनी सूरु करदी , की सारे मजदूरों का हाल बुरा कर दिया सरकार ने , इसका तो नू करदु , हटाना है इस बार , अगहरा -वघेरा पर उसकी बातों में मुझे सच्चाई नजर नही आई मसलन जो वो कहना चाहता था वह उसके दिल के लफ्ज़ नही थे , शायद मैं मुस्लिम हूं इसलिए उसने मुझे खुश करने के लिए ऐसा बोला हो कि मुस्लिम इस राजनीति दल को पसंद नहीं करते हैं जबकि ऐसा नहीं है हम या यूं कहें कोई भी आम इंसान यदि कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में आकर बराबरी , इंसाफ ओर हक पर रहकर काम करे तो उस दल से चाह कर भी कोई क्या नफरत या घृणा कर सकता है..? मेरे ख्याल से तो नही!
, शायद उस भाई को लगा हो कि मुझे इस समय काम करवाना पड़ रहा है तो मक्खन लगा दूं , यह केवल मेरी सोच है , किसी के दिल की बात क्या जानू, फिर जब बाइक ठीक हो गई तो मैने उसकी नम्बर प्लेट पर जो पीछे लगी होती है उसपर फूल प्रिंट हुआ देखा और नीचे एक खास जाती का नाम और एक तलवार टाइप का एक सिंबल बना हुआ देखा। जो एक विचारधारा को दर्शाता है।
मुझे समझ आ गया था कि यह क्या माजरा है ।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है।
उसके हजार जतन करने के बाद भी मैने उस भाई से पैसे नही लिए , जबर्दस्ती एक बच्चे को कुछ पैसे देकर चला गया ।
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