पिछले दिनों अखबार में एक खबर आई कि , इटली जो यूरोप में एक बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है , वो अपने मुल्क में उन लोगो को नागरिगता देने की योजना बना रहा है जो उस देश मे जनसंख्या वृद्धि कर सके भले ही वे लोग किसी भी देश के निवाशी हों , अखबार पूरी तरह से सपष्ट नही कर पाया कि आखिर क्या साबित करना चाहती है इटली की सरकार ?
पर उसका भाव यह प्रदर्षित कर रहा है कि वह देश जवान , युवाओं की कमी से बुरी तरह जूझ रहा है
हम सब बैठ कर बात कर रहे थे , शाम का समय था , सामने एक गोल मेज थी जिस पर तीन चाय के कप रखे हुए थे , पंखा जो छत पर टँगा हुआ था ,वह रेगुलेटर की मदद से धीमा कर दिया था जिससे मालूम हो रहा था जी अब इतनी गर्मी नही रही , अनक़रीब शर्दी दस्तक देने वाली हैं, इस मौसम को अमूमन लोग प्रिय मौसम कह देना सही समझते हैं , इसकी वजह से लोग गर्मी का बहाना बनाकर परिवार से अलग थलग रहना भी कम कर देते हैं, जिससे कुछ चर्चायें बढ़ जाती हैं , कुछ नया शिखने को मिल जाता है, एक दूसरे की अंदर चल रही भावनाओं , स्कीमों, और तमन्नाओ का पता चल जाता है।
हमें परिवरिक बने रहना चाहिए, उसके अनेक फायदे हैं, हमारी संस्कृति का उद्धगम, हमारी सोच, हमारी मानसिक क्रांति , यह सब परिवार में ही निहित है।
चाय का चौथा कप आ गया , मतलब हमारे पिता जी भी अपने काम से लौट आए, उनके मस्तिष्क के बाहरी हिस्से पर जिसे माथा कहते हैं पर असमंजस का नजारा देखने को मिला , उनकी चिंता हमे परेशान कर रही थी, जब हम किसी दूसरे मानव के प्रति जिम्मेदार होते हैं और वो हमसे छोटा या नासमझ होता है तो हमारी जिम्मेदारी कोई नही बांट सकता।
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