मैं अपने करीबी एक टी-स्टाल पर गया था, जो मेरे चाचा चौधरी चलाते हैं , मेरी भांजी रिदा 2.5 वर्ष मेरे साथ थी , उसको कुछ खाने के लिए दिलाने के एवज में स्टॉल पर गया था , चूंकि रिदा बहुत चुलबुली है तो उसने स्टाल पर जाकर भी अपना चुलबुला पन जारी रखा , वँहा पर एक 30 साल के करीब की उम्र का लड़का बैठा था जो चाय पीने के लिए वँहा पर बैठा था और अपनी चाय पुरी कर चुका था पर वो रुका हुआ था , उसने रिदा की इस प्यारी सी मासूमियत भरी बातों को बड़ी दिलचस्पी से देखा और हसने लगा , जैसा अक्सर लोग करते हैं , मेने यूँही बचपन जैसे मज़ाक में रिदा से बोला कि बेटा बड़ी होकर क्या बनोगी तो रिदा ने देरी न करते हुए अपने रटे हुए जवाब को दोहराया जो उसकी अम्मी ने उसको रटा रखा है " मामू मैं पुलिस बनूँगी" मैं हमेशा की तरह मुस्कुराया ओर मेरे साथ वह 30 साला लड़का भी , उसने यह भी कहा कि इतनी सी बच्ची की सोच बहुत बड़ी कर रखी है , इसपर मुझे बहुत अच्छा लगा कि लोग पुलिश बनना बड़ी सोच मानते हैं और मेरी भांजी अभी से बड़ी सोच को अपने मस्तिष्क में बनाये हुए है।
पर कुछ ही देर में उस लड़के का एक दोस्त आया जो उसको गाली देकर बात करते हुए मजाक करने लगा उसके बदले में उस लड़के ने भी गाली दी और मजाक करते रहे , उनकी गाली गलौच को मैं अपने हांथ से नही लिखूंगा क्योंकि मैं ऐसे शब्दों को भाषा से अलग मानता हूँ।
इस गाली गलौच के बीच मेरी रिदा सहम सी गई और उन दोनों के चेहरों को बड़ी हैरानगी से देखती रही , उसे शायद यह सब पसन्द नही आ रहा था, मुझे भी बहुत गुस्सा आया मेरा मन भी किया कि मैं इनको कुछ कहूँ पर मैं मुह नही लगना चाहता इन लोगो के जिनको यह भी एहसास नहीं है कि एक बच्चे के सामने किस तरह बर्ताव करना चाहिए, वो मुझे कई बार जुमे के दिन मौलाना की बात को बड़ी गम्भीरता से सुनते हुए दिखाई देता है पर मौलाना साहब तो बहुत शख्ती से बदजबानी को रोकने के लिए तकरीर करते हैं पर असर नहीं होता इसमे मौलाना साहब का क्या कुसूर ।
मुझे लगता है इस मुआशरे को जीरो से सीखना होगा अभी बहुत सारी खामियां हैं इसमे
"अभी जन्नत के ख्वाब मत दिखाओ इनको ,
जमीन पर रहने दो इक एहसास दिलाओ इनको,
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