खुदको बदलो

वे पदार्थ जो जलकर ऊष्मा प्रदान करते हैं उनको ईंधन कहा जाता है , और ईंधन की यह खासियत है कि उसके बिना लगभग सभी प्रकार की गतिविधियों रुक सी जाएंगी , अब आपको ईंधन बनने का मौका मिला है यदि ऊष्मा न मिली तो व्यर्थ है , आप मुल्क के साथ साथ संसार को रोशन कर सकते हैं आपके हांथ आपके मस्तिष्क के हवाले हैं इसी के काबू में हैं, आप पर कोई मामूली या गैरमामूली पाबन्दी नही है , आप काबिल हैं  , सब्र दार हैं , आप तालीमयाफ्ता भी हैं ,और कठिनाइयों को चुनोती देने वाले भी हैं , आपके बुजुर्ग के सर (मस्तिष्क या दिमाग) आपके ऊपर रखा हुआ है जो आपकी उस पहचान को उजागर करता है जिसपर कहीं न कहीं  गर्व कर ही लेते हैं , मैं यह नही कह रहा कि इस रेसेंटली फैसले के बाद खुद में तब्दीली लाये, मेरी तो सदा से यही बात रही है कि आपके अंदर जेहनी तब्दीली की बहुत धीमी गति है बस उसको तेज रफ्तार देनी है, आपको हर उस चीज पर नजर रखनी है जो इंसानी फायदे के लिए हो और उसमें आपकी मदद से संचालन प्राप्त हो सके , आप कौमी बनिये पर उम्मती की कुर्सी को लात मत मारिये ।पूरी दुनिया में आपका बोलबाला है पर उसके साथ साथ आप बेहद कमजोर हो चुके हैं , आप किसी भी तरह इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि जो काम आप 24 घण्टे कर रहे हैं वो  नाकाफी साबित हो गया है , आप जज्बा भी रखते हैं पर जज्बाती भी हुए जा रहे हैं ।
मेरे कहने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप मेरी किसी बात को मान लें , बस मैं तो कहना चाहता हूं किसी को कुछ सीखना हो तो आपसे सीखे इस तरह खुदको बदलो।

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