डीटीसी फ्री फेयर

दिल्ली की महिलाओं के लिए डीटीसी बस में फ्री - सफर का इंतेज़ाम दिल्ली सरकार द्वारा किया गया है , जिसमे हर वर्ग की महिला हैं, अर्थात गरीबी रेखा के आस - पास महिला, मिडिल क्लास महिला, जॉब करने वाली लड़कियां, वृद्ध महिला, बीमार महिलाएं ,इत्यादि चूंकि अमीर घरों में रहने वाली महिलाएं अधिकतर अपने निजी वाहनों में ही सफर करती हैं और ज्यादातर मौकों पर वह दिल्ली मेट्रो को प्राथमिकता देती हैं इसलिए उनको सम्मिलित करना उचित नहीं होगा । tax payers का पैसा है जिसे महिलाओं की सुविधा के लिए खर्च किया जा रहा है जिसका मुश्किल से ही कोई विरोध कर पायेगा क्योकि मामला महिलाओं से जुड़ा है और संवेदनशील है इसलिए बयान भी नपे तुले हुए ही सुनने को मिलेंगे , फिर भी लोग अपने मन का बोझ जरूर हल्का करेंगे और कुछ अनचाहा बोल ही देंगे , दुसरी ओर कुछ इंटेलकटचुअल लोग इसका कुछ विरोध भी करेंगे जो होना भी चाहिए, मेरे विचार में यह स्वतंत्रता पर भी राजनीतिक घेराबंदी है क्योंकि बहुत सी महिलाएं पैसा देना चाहेंगी जो फ्री में सफर करना अपने व्यक्त्वि के खिलाफ समझती हैं मेरे ज्ञान में नही है कि इस प्रकार की महिलाओं के लिए क्या सुविधा उपलब्ध है?
वास्तव में बात यह है कि इस राजनीतिक स्टंट में प्रदेश को कितनी राजस्व हानि होने वाली है और अन्य प्रदेश सरकारो पर किस प्रकार के प्रजातात्मक दबाव बनने वाले हैं?
मेरे विचार में जिन महिलाओं को किराए में छूट दी जा रही है वह अपना प्रतिदिन का किराया किसी NGO को दान स्वरूप प्रदान करें और उस पैसे से कोई ऐसा कार्य किया जाय जिससे विश्व में दिल्ली की जनता का नाम हो , 2018 जनवरी 14 को एक मशहूर न्यूज़ पेपर में एक एडिटोरियल छपा जिसमे बताया गया था कि 19 करोड़ भारतीय रोज भूखे पेट सोते हैं यह बहुत गम्भीर समस्या है जिसका देश के प्रत्येक नागरिक को ज्ञान होना लाजमी है ,और मै यह भी जानता हूँ कि भूखी जनता की जिम्मेदारी सरकारों की होती है पर आप आंख बंद करके सपने देखने मे व्यस्त हैं पर आंख खुलने पर सच तो देखना ही पड़ेगा।
अर्थात जनता( टैक्सपेयर्स) का पैसा जनता के ही काम आ जायेगा , पर ऐसा यूरोप में हो सकता है अभी हम पर बहुत मुद्दे हैं जिनपर लड़कर खून बहाना है ,ओर बिना जाती धर्म देखे आपका अस्पताल में इमरजेंसी में विभिन्न जाती धर्मो के डॉक्टर्स इलाज करके आपको दोबारा लड़ने के लिए तैयार कर देते हैं।।

धन्य........
मैं पूरा धन्यवाद नही लिखूंगा क्योंकि मैं मानसिक रूप से तनाव में हूँ।
क्योकि मैं देश में विचित्र बदलाव देख रहा हूँ।

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