दस सिर या दस दिमाग

रावण के दस सर थे अर्थात इसको प्रतीकात्मक रूप से देखें तो दस सर होना यह दर्शाता है कि उस मानव के दिमाग में दस आदमियों जितना भेजा था , उसके बाद यह भी दरसाया गया है कि उसके अंत के लिए काफी बड़ा युद्ध करना पड़ा , जिसमे बहुत से वीर भी घायल हुए , वीरगति को प्राप्त हुए , और तो और रामायण के अनुसार श्री राम जी को स्वयं आकर उस दसानन्द को पराजित करना पड़ा , और इसमें यदि प्रतीकात्मक रूप से विश्लेषण किया जाय तो यह बात सामने आति है कि रावण घर बैठ कर दसानन्द नही बना उसने ज्ञान हासिल किया और अत्यधिक ज्ञान हासिल किया , जिसके चलते उसकी पराजय सवतः ही कठिन हो गई ,
आप इस को आज वर्तमान समय पर लागू कर के विचार कर लीजिए अगर आपके पास टाइम हो तो

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