समाज की सेवा और बदलाव

समाजसेवा , परिपक्वता और तार्किकता का अखाड़ा है , आपके दिमाग से आपकी जबान को असाधारण सन्देश मिलते हैं और आप हर स्तिथि को संभाल लेते हैं तो आप स्वयं को विजेता न घोषित करें , मस्तिष्क का कार्य होता है अपने अंदर से अनेको प्रकार के कैमिकल को रिलीज करके आपके शरीरी तानेबाने को संतुलन में रखना , वो आपको चिंता मह्सूस करवाता है ताकि आप लापरवाह न हो जाये , वो आपको आपके डी०एन०ए ० की खुश्बू की पहचान कराता है ताकि आप अपने माता- पिता के प्रति वफादार रहें आप इसे मुहब्बत भी कह देते हैं और सारी उम्र यही खुश्बू आपको आपके परिवार के आस पास मंडराने को मजबूर कर देती है, इसे आप लगाव भी कह सकते हैं , आपको बता दिया जाता है कि आपके सभि अच्छे कामो की सराहना नही की जाएगी पर आप उम्मीद में रहते हैं कि आपकी प्रसंशा की जाए , इसे आप लालच या ललक भी कह सकते हैं , इस दुनिया में सबसे बेहतर कार्य है खुद को डिसिप्लिन रखना , यह आप बहुत कम कर पाते हैं या यूं कहें कर ही नही पाते , आपके मस्तिष्क में इन्फॉर्मेशन का अंबार है , वोही आपको उस समय खड़ा कर देता है जब आप अनेको जगह निराश होकर खुद को कमजोर पाते हैं , इसको आप उदासीनता भी कह सकते हैं , सर्वप्रथम आपको जो कार्य करना है वो है खुद को शसक्त व मजबूत बनाना , जब आप खुद खुस रहेंगे तो आपको समाज में भी खुसी नजर आएगी , वरना आप विरोध करते -करते अपने काले सर को सफेद कर बैठेंगे , यह भी सच है कि आपको कोई रोक नहीं सकता क्योंकि आप स्वयं इतना आगे बढ़ चुके हैं कि अब आप किसी की हैडशिप को तुच्छ समझने लगे हैं इसे आप अहंकार भी कह सकते हैं , हजारो पंकितयों को लिखा जा सकता है पर उससे आपकी फाइट कम नही होगी , आपकी फाइट आपके मस्तिष्क से है इसको हरा पाना मुश्किल होता है इसको समझना आसान होता है।

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