मुस्लिम समाज में गरीब घरों में चूंकि बच्चे उस तरह की तालीम हासिल नहीं कर सकते हैं इसी लिए मुख्यत: , लड़के कोई दस्तकारी का काम , जैसे कारपेंटर , वेल्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक , मैकेनिक इत्यादि का काम एवं लड़कियां सिलाई ,बुनाई , कढ़ाई , ब्यूटी केयर ( अपवाद) का काम सीखने जाती हैं।
लड़कियों को अगर ये काम किसी पड़ोसन भाभी के यहां सीखने जाना पड़ता है तो उस घर के बहुत से घरेलू काम उन काम सीखने आई लड़कियों से करवाए जाते हैं ।
जिससे उनको घरेलू काम के साथ - साथ एक्स्ट्रा हैंडीक्राफ्ट के काम भी आ जाते हैं ।
कभी ये सीखे हुए काम जीवन में इनका शौक बनते ओर कभी इनकी जीविका का हिस्सा ।
वो लड़कियां न इससे अधिक सोचती हैं ओर नाही उनको सोचने दिया जाता है ,। चलो अब जो भी है लोग इसी तरह अपना जीवन जीना चाहते हैं तो जिएं।
लडको की बात मै करना भूल गया, अगर मै कुछ ग़लत लिखूं तो आप सही कर देना ।
मैंने अक्सर देखा है जहां मुस्लिम लड़के काम सीखने जाते हैं , वहां पर मौजूद ज्यादातर लोग, सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से विकसित नहीं हो पाते ओर सभ्यता से बहुत दूर होते हैं , उनको केवल अपने काम ओर उससे कमाए धन से मतलब होता है , बहुत से बच्चे सुरुआती दिनों में काम पर जाकर फिर बहाना बना कर कारखाने से छुट्टी करना चाहते हैं ।
इसकी कोई भी वजह हो , मुझे नहीं पता खुद तलाश कीजिए पर आप एक काम करो आपके आस पास अगर ऐसा होता है तो उसकी जांच करने का प्रयास कीजिए,।
दूसरी बात ये है कि वहां पर मौजूद अन्य दूसरे कारीगर नौसिखिया को मां - बहन की गलियां देते हैं जिनका बच्चे के मस्तिष्क पर बहुत नकारात्मक असर पड़ता है। ओर उसका निष्कर्ष ये निकलता है कि वो बच्चा ट्रेंड होने पर अपने अधीनस्थ काम सीखने अाए बच्चे को भी उसी तरह गली देना शुरू कर देता है ,या उस्ताद जी को बदल देता है , या कभी कभी उस्ताद जी या गाली देने वाले को मजा भी चका देता है ।
ओर आश्चर्य की बात ये है कि उस्ताद द्वारा दी जाने वाली गालियां बच्चे के माता पिता के लिए वरदान साबित हो रही होती हैं ।
,चूंकि , वो लोग इनकी गलियों का कोई विरोध ही भी करते हैं ओर इस प्रकार ये कौम गाली बकने वाली कौम के तौर पर मशहूर होती जाती है ।
ओर हम भी कभी कभी इन गालीबाज इंसानों की गलियां सुन लेते हैं ,। पर केसे ..? अगर आप जानना चाहते हैं तो आपको कुछ एग्जाम्पल देता हूं
जब कभी सड़क पर जाम लग जाता है और हमारे पीछे वाला शकश मोटर साइकिल पर बैठा चीखता हुआ गाली बक देता है, या हमसे कोई छोटी मोटी चूक हो जाए ट्रैफिक नियमों में तो कोई भी सड़क पर चलते हुए गाली बक देता है ,ओर हम सुन कर अनसुना करके आगे बढ़ जाते हैं कभी कभी तो अगर हमारी वाइफ हमारे साथ है तो गाली सुनकर बहुत ही बुरा लगता है , वो बेचारी इग्नोर कर देती है तब हमें अपनी बीवी बहुत समझदार लगती है क्योंकि वो बेहया लोगो को नजरंदाज कर रही है।।
लड़कियों को अगर ये काम किसी पड़ोसन भाभी के यहां सीखने जाना पड़ता है तो उस घर के बहुत से घरेलू काम उन काम सीखने आई लड़कियों से करवाए जाते हैं ।
जिससे उनको घरेलू काम के साथ - साथ एक्स्ट्रा हैंडीक्राफ्ट के काम भी आ जाते हैं ।
कभी ये सीखे हुए काम जीवन में इनका शौक बनते ओर कभी इनकी जीविका का हिस्सा ।
वो लड़कियां न इससे अधिक सोचती हैं ओर नाही उनको सोचने दिया जाता है ,। चलो अब जो भी है लोग इसी तरह अपना जीवन जीना चाहते हैं तो जिएं।
लडको की बात मै करना भूल गया, अगर मै कुछ ग़लत लिखूं तो आप सही कर देना ।
मैंने अक्सर देखा है जहां मुस्लिम लड़के काम सीखने जाते हैं , वहां पर मौजूद ज्यादातर लोग, सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से विकसित नहीं हो पाते ओर सभ्यता से बहुत दूर होते हैं , उनको केवल अपने काम ओर उससे कमाए धन से मतलब होता है , बहुत से बच्चे सुरुआती दिनों में काम पर जाकर फिर बहाना बना कर कारखाने से छुट्टी करना चाहते हैं ।
इसकी कोई भी वजह हो , मुझे नहीं पता खुद तलाश कीजिए पर आप एक काम करो आपके आस पास अगर ऐसा होता है तो उसकी जांच करने का प्रयास कीजिए,।
दूसरी बात ये है कि वहां पर मौजूद अन्य दूसरे कारीगर नौसिखिया को मां - बहन की गलियां देते हैं जिनका बच्चे के मस्तिष्क पर बहुत नकारात्मक असर पड़ता है। ओर उसका निष्कर्ष ये निकलता है कि वो बच्चा ट्रेंड होने पर अपने अधीनस्थ काम सीखने अाए बच्चे को भी उसी तरह गली देना शुरू कर देता है ,या उस्ताद जी को बदल देता है , या कभी कभी उस्ताद जी या गाली देने वाले को मजा भी चका देता है ।
ओर आश्चर्य की बात ये है कि उस्ताद द्वारा दी जाने वाली गालियां बच्चे के माता पिता के लिए वरदान साबित हो रही होती हैं ।
,चूंकि , वो लोग इनकी गलियों का कोई विरोध ही भी करते हैं ओर इस प्रकार ये कौम गाली बकने वाली कौम के तौर पर मशहूर होती जाती है ।
ओर हम भी कभी कभी इन गालीबाज इंसानों की गलियां सुन लेते हैं ,। पर केसे ..? अगर आप जानना चाहते हैं तो आपको कुछ एग्जाम्पल देता हूं
जब कभी सड़क पर जाम लग जाता है और हमारे पीछे वाला शकश मोटर साइकिल पर बैठा चीखता हुआ गाली बक देता है, या हमसे कोई छोटी मोटी चूक हो जाए ट्रैफिक नियमों में तो कोई भी सड़क पर चलते हुए गाली बक देता है ,ओर हम सुन कर अनसुना करके आगे बढ़ जाते हैं कभी कभी तो अगर हमारी वाइफ हमारे साथ है तो गाली सुनकर बहुत ही बुरा लगता है , वो बेचारी इग्नोर कर देती है तब हमें अपनी बीवी बहुत समझदार लगती है क्योंकि वो बेहया लोगो को नजरंदाज कर रही है।।
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