अवेयरनेस पोस्ट संख्या- 1

हालांकि मै किसी ओहदे पर मौजूद किसी समूह को कुछ कहने की जरा भी हिम्मत नहीं जुटा सकता , क्योंकि जो लोग ओहदों पर होते हैं उनके पीछे उनकी मेहनत होती है बिना तपे सोना कुंदन नहीं बनता , पर इसके अलावा ये बात बिल्कुल सही नहीं है कि मेहनती इंसान ही हर तरह से कामयाब हो सकता है अपवाद भी होता है गलत तरीके से किया गया काम ओर उसके जरिए हासिल किया गया ओहदा कोई ओहदा नहीं होता उसका कब्जाया हुआ सिंहासन केह सकते हैं।



अवेयरनेस पोस्ट संख्या -2
मुस्लिम समाज में आज हजारों खामियां लोगो के जरिए तलाशी जा रही हैं उनको मोका मिलता है क्योंकि आप मोका दे रहे हैं ,
एक बहुत बड़ी मुस्लिम आबादी आज भी रहनुमाओं की बात पर अमल करती है , अगर बात गलत ना लगे तो रहनुमाई ही लोगो के इस हाल ही जिम्मेदार बनी हुई है।
मेरा मकसद किसी की तकलीद पर उंगली उठाना नहीं है जिसको जो रहनुमा अच्छा लगे उसकी बात समझ में आती तो बुरा, जालिम ओर बेलगाम ना बनाता हो उसको फॉलो करो सब बढ़िया हैं कोनसा तुमको चोबीस घंटे उनकी बात माननी होती है तुम्हारा घर परिवार भी एक लाज़िम हिस्सा है उसका भी ख्याल रखो उसको भी वक़्त दो ,मौलवी , मौलाना , मुफ्ती , वली , उस्ताद ,साहिब सबकी इज्जत करो ओर सबको कहो कि जो आप करते हैं वो कोई नहीं कर सकता ,मतलब आप सबको फॉलो करते हैं ओर किसी को भी बुरा नहीं बोलते।

अवेयरनेस पोस्ट संख्या -3
पिछली पोस्ट में जो बात कही गई थी उससे कुछ लोगो को जरा गुस्सा लगा ओर कुछ लोगो को बात पसंद आई ,खेर जो भी हो ! आप कमसे कम बुरा लगने के बाद चैन से सो तो गए इसका मतलब आप अपने रहनुमाओं के बारे में कुछ बात सुनकर आराम से सो सकते हैं अब आप गौर  करें कि आपकी ज़िन्दगी में उनका क्या मकाम है ? यानी आपको कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि आपके इतने बड़े उस्ताद पीर मौलाना मुफ्ती साहिब हजरात को वो इज्जत नहीं दी गई जो देनी चाहिए थी ,इससे आपके ओर उनके दरमियान के रिश्ते का पता चलता है , जो ज्यादा खास या सगा सा नहीं है!
तो फिर आपको बुरा जो लगा उसका क्या मनोवैज्ञानिक कारण है क्या आपने कभी सोचा ..?


अवेयरनेस पोस्ट संख्या -4
आप ने अगर वो मनोवैज्ञानिक कारण तलाश लिया है तो उसको अपने पास रखें मुझे नहीं जानना आपने कहा सोचा है।
फिलहाल आप मेरी बात पर गौर कीजिए जो मै बताया हूं उसपर कुछ गहरी ओर लंबी निगाह रखे।
असल में हम जानते हैं की किसी इंसान को तभी कुछ कहा जा सकता है जब उसमे कोई कमी हो , हां जी हां आपने सही सोचा ,बाज मोकों पर सही को भी गलत तरीके से पेश किया जा सकता है पर मेरी पोस्ट में ऐसा कुछ नहीं हो रहा , यहां पर जो कुछ लिखा जा रहा है उसमे कोई दुस्मनी नहीं है लिहाजा आपके दिमागी दीवारों पर जो नफ़रत या फिर्का का पेंट लगा हुआ है उसको साफ कीजिए, जैसा आप सोच रहे हैं ऐसा कुछ नहीं है । असल में हम उम्मीद के मारे हैं ।
क्या कहा ? जी हां उम्मीद ही कहा,।।पर केसे ,?

आगे पढ़िए पता चल जाएगा!

अवेयरनेस पोस्ट संख्या  -5

"उम्मीद "पर बात करते हुए आगे बढ़ते हैं ,उम्मीद वैसे कायनात के मालिक से रखी जाती है और उससे उम्मीद रखने वाला कभी नाकाम नहीं होता ,पर खुदा के यहां देने का भी नियम है वो सही कर्म करने वाले को प्रायोरिटी देता है ,।
अब आप ये मत कहना कि वो सबको बराबर देता है , हां देता तो बराबर ही है पर ये बात आप नास्तिक या किसी ओर धर्म के इंसान के सामने बोलना की ""खुदा कातिल ओर मकतूल दोनों के साथ बराबरी का मामला करता है यानी कातिल को चाकू मुहैय्या कराने का काम ओर मकतूल को सीना इसलिए देता है ताकि कातिल मकतूल का सीना उस चाकू से गोद कर फाड़ दे""
नास्तिक और गैर मुस्लिम आपकी बात को लेकर काफी चिंतित हो जाएगा ओर आपको पागल कहने से पहले आपके मजहब को जरूर कुछ भला बुरा कह देगा।

असल में बुराई का खुदा के यहां कोई सपोर्ट नहीं!

चलिए मान लिया आप अपने इल्म से उसको समझा देंगे पर याद रहे आजकल लोगो पर इतना समय नहीं है कि वो आपको समझने के लिए बैठा रहे ,इसलिए ये काम बहुत जल्दी होना चाहिए ओर इस का आसान तरीका है कि आप गलत को गलत बोलिए ओर ,ओर गलत इंसा  को सज़ा दी जाए इसकी हिमायत कीजिए।।।

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