जामिया मिल्लिया इस्लामिया

मौलाना मोहम्मद अली जौहर, शौक़त अली, मौलाना आज़ाद, डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन जैसे सैकड़ों अज़ीम शख़्सियतों के ख़्वाब की ताबीर का नाम है 'जामिया मिल्लिया इस्लामिया'।

ये महज़ एक यूनिवर्सिटी ही नहीं है ये एक विरासत है जिसे उन लोगों ने खड़ा किया था जो आधुनिक भारत के शिल्पकार थे, जिन लोगों ने राष्ट्र निर्माण में अपनी पूरी ज़िन्दगी तक वक़्फ़ कर दी।
ये वही जगह है जहाँ से आज़ाद भारत का ख़्वाब देखा गया, जहाँ बैठकर स्वतंत्रता सेनानी आने वाले सुनहरे कल के लिए रणनीति तय करते थे।
ये वही यूनिवर्सिटी है जिसने एक से बढ़कर एक नगीने पैदा किए और वे लोग आगे चलकर मानव कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका अदा किये।

पर आज दयार-ए-शौक़ के मतवालों एवं अहल-ए-शौक़ की बस्ती में रहने वालों को देखकर अफ़सोस होता है कि किस तरह से ये लोग इसकी बुनियाद को ख़त्म करने में लगे हैं!
एक ऐसा शख़्स जो अजमेर ब्लास्ट का आरोपी है उसको उस जगह बुला रहे हैं जहाँ पर कभी मौलाना मोहम्मद अली जौहर और ज़ाकिर हुसैन जैसे लोग बैठ कर मुल्क-ओ-मिल्लत की ख़िदमत किया करते थे।

ये नाइंसाफ़ी है हेमंत करकरे जैसे शहीदों के साथ जिन्होंने हक़ और इंसाफ़ की लड़ाई में अपनी ज़िंदगी तक क़ुर्बान कर दी।

जामिया वालों शर्म करो! हो सके तो अपने ज़िंदा होने का सबूत दो!

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