इनायत एक मोमिना

।इनायात ।
पार्ट -1
(जावेद अहमद मेरठ)


सच्चा किस्सा!

मै एक बार बीमार था बॉडी पर इंफेक्सन हो गया था , तो मै दिल्ली के तेगबहादुर GTB ,चला गया , काफि भीड़ रहती है ,इन अस्पतालो में कइ लाइने लगती है ,जिसमे औरतो और मर्दो की अलग- अलग होती हैं।
मै भी लाइन मे खडा़ अपनी बारी का इंतजार कर रहा था, पर यह आसान न था मुझसे आगे काफि मरीज मौजुद थे ,सायद हजार से उपर थी तदाद, मुझसे दो लोग जो आगे थे किसी मदरसे के तलबा ( students) थे , और किसी मुददे पर बात कर रहे थे , सायद अपने किसी साथी तलबा की किसी बदअमली पर गुफ्तगु कर रहे थे , जिस इंसान की वह बात कर रहे थे ,उनको जुमे का " खुत्बा" बिना देखे याद नही था , और मस्जिद मे उनको खुतबा पढकर नमाज पढाने की जिम्मेदारी मिल गइ थी, और मस्जिद से खुत्बे की किताब नदारद थी...यही उन दोनो तलबा के दरमियान का तफरी भरा मसला था ।
तभी आगे मौजुद एक गैर मुस्लिम जो कि काफी तहजीब व तमीजदार इंसान थे , उन्होने इस मसले पर अपनी दखल कर दी ,और कहने लगे , ।

आप लोग स्टुडेंट्स हैं , वह दोनो तलबा ,खामोश हो गये , कहने लगे हां जी, और फिर दौबारा अपनी उन्ही बातो मे मशरूफ हो गये।

उन्होने कहा , मेरा नाम मदन है , और मै किसी मजहब को नही मानता पर मेरा ताल्लुक **** धर्म से है।
तलबा ने कहा कुछ नही पर हंस पडे़....!

मदन जी ने कहा , आप एक बात बतायें आप यह " अकबर " को इतना सम्मान क्यों देते हो , बादशाह तो और भी रहे हैं फिर अकबर का ही इतना एहतराम क्यो , सायद यह जोधा बाइ को लेकर है , हैना?

बच्चो मे कहा कौन अकबर ?
हम तो केवल अल्लाह को मानते हैं...।
मदन :- पर आप पांच-छ बार अकबर -अकबर करते हैं ,उसका क्या...?
तलबा अब समझ गये कि यह शक्स "आजान " की बात कर रहें हैं..।
फिर उन्होने उनको अकबर की सही सकल समझने की कोशिस की और कहा ,अकबर का मतलब होता है " बड़ा" सबसे बडा़ और हम आजान मे अल्लाहुअकबर कहते हैं नाकि केवल अकबर , जिसका मतलब होता है , अल्लाह सबसे बडा है..:!

मदन यह अल्लाहुअकबर की परिभाषा से बहुत खुश हो गये ,। कहा क्या बात है...!
पर यह तो बतायें अल्लाह का मतलब क्या होता है..?
अकबर का तो आप ने बता दिया।
तलबा खामोश थे , एक दूसरे के मुह को ताकने लगे सायद उनके पास एक जवाब नही था , दोनो ने अपने हिसाब से जवाब दे दिया, ।।
एक ने कहा अल्लाह का मतलब जिसने हमको बनाया ,मिटाया खिलाया, हमको हर चीज अदा की..( बेसक). और भी बहुत सी बात कहीं थी ( मै भुल गया)

दूसरे ने कहा:- अल्लाह इस पुरे कायनात का मालिक है, वह डाक्टरो का भी डाक्टर है बादशाहो का भी बादशाह है ( बेसक)

मदन ने कहा:- यह बात तो वह भी कह सकता है जो अल्लाह को न मानकर दुसरे खुदा को मानता है, वह भी तो इसी बेस पर अपने गैर खुदा की इबादत करता है कि उस से इष्ट देव ने भी उसको पेदा किया , खिलाया पिलाया , और वह यह भी कहता है कि उसका स्वनिर्मित खुदा ही दुनिया का मालिक है , ।

फिर आपका मजहब सच्चा मजहब कैसे हुए ,दोनो मे काफि समानतायें है..?

तलबा हैरान हो गये , सोच मे पड गये।कि इस दुनयावी इल्म के माहिर को किस तरह जवाब दिया जाय..?

तभी एक एसी घटना घटी जिसको मै आजतक याद करके औरत जात या लडकीयों पर फक्र करता हूं।
बगल की लेडिस लाइन मे एक लडकी मौजुद थी उसका नाम था " इनाया( इनायत) ( नाम का मुझे पता चला क्योकि उसने अपने हाथ पर मेहंदी से लिख रखा था)
इनाया को एक अजीब सा सउर आया और वह मदन व दीगर लोग जो इस मामले को देख रहे थे की तरफ मुखातिब होकर अपने हिजा़ब से. बोल पडी़

Sir, I want to tell you ,the definition of Allah"...!
एक साधारण सी दिखने वाली लडकी के मुह से अंग्रेजी का उच्चारण सुनकर सभी लोग हैरान हो गये , क्योकि" इनायात " का पहनावा बडा बाअखलाक था, वह चेहरे पर एक सुती कपडा़ लपेटे हुए थी ,उसके पैरो मे जु़राब थे और साधारण सी चप्पले।
सायद मदन जी को अभी तक वही लडकी देखि होगीं जो जिंस टॉप पहनकर अंग्रेजी बोलती होंगी ,यह सादा लिबाज़ की लडकी जो यहां सरकारी अस्पताल मे दवाइ के लिये खडी है , यह कैसे अंग्रेजी बोल सकती है , और बोल भी एसे टापिक पर रही है कि , बडा़ ही लाजिकल है।
..
मदन ने अपनी उपर की जेब से डायरी व पेन निकाला और कहा ,जी बोलिये।

इनायत ने कहा  सर  Holy कुरान की 112 नबंर के अध्याय ( सुरा:, chapter)
मे अल्लाह की definition  मौजुद है।

बताया इस लिये के आप खुद कुरान को चेक करलें ।


بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيم
Bismillāhi r-raḥmāni r-raḥīmIn


 the name of Allah , the Entirely Merciful, the Especially Merciful


.112.1
.قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَد
ٌQul huwa-Llāhu ʾaḥadan


Say, "He is Allah , [who is] One

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,112.2

.ٱللَّهُ ٱلصَّمَد
ُAllāhu ṣ-ṣamaduAllah

 , the Eternal Refuge.
_______________________________
112.3
.لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْLam yalid walam yūlad

He neither begets nor is born

_______________________________
,112.4

.وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَد

ٌۢWalam yakun lahu kufuwan ʾaḥadan

Nor is there to Him any equivalent.

( If anyone wants to read full commentary so please click on. This link👇👇👇

http://englishtafsir.com/quran/112/index.html
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जारी रहेगा .......

।इनायत ।
पार्ट -2
( जावेद अहमद मेरठ)
सच्चा किस्सा!

इनायान ने बडी़ सादगी से अल्लाह की परिभाषा ,मदन जी को दे दी, और वह इन आयतो को समझ भी गये पर वहां खडे हर  शक्स को अब यह बात समझने की ख्वहिश पैदा हुइ , क्योकि , गैर मुस्लिम कि तो बात अलग है मुस्लिम को भी यह बात नइ लग रही है , बाज तो कुरआन को अंग्रेजी भाषा मे पढाने पर भी नाराज हो गये थे पर कह नही पा रहे थे क्योकि लडकी की इल्मियत के आगे उनकी पकड कमजोर पड़ रही थी,।
तभी वहां खडी एक लेडिस पुलिस अधिकारी या कांस्टेबल ( मुझे याद नही रहा) जो भीड़ को कंट्रोल करने के लिये मौजुद रहते हैं , उन्होने कहा ' बेटी जरा हिंदी मे भी समझा दो,..!
तमाम इच्छुक लोगो की मुह की बात उन महिला पुलिस की जबान. से निकली और मजमा सुनने को तैयार हो गया...

इनायान ने उन पुलिस अधिकारी की तरफ देखा और कहा ,. जी मै बिल्कुल बता देती हूं,,।

जी इस चैपटर मे हमे यह बताया गया है कि अगर आपको कभी खुदको या किसी दुसरे को अल्लाह के बारे मे समझने की जरूरत पडे तो यह चैपटर पढलें , समझ भी लें और समझा भी दें अगर हो सके तो ( क्योकि हर इंसान सत्यता को आसानी से नही मानता )

१- अल्लाह एक है तनहा है
२ वह बेनियाज है
३- न वह किसी से जन्मा है नाहि वह किसी को जन्म देता है
४- उसका कोइ हमसाया , पार्टनर भी नही है...

अगर यह बात किसी के भी खुदा मे मौजुद हैं तो यकीनन वही खुदा सच्चा है और मै इस आधार पर ही उसको खुदा मानलूंगी...

सब लोग अपने अपने खुदाओ का तसव्वुर करने लगे और सबके मुह से कुछ न निकला ,क्योकि यह क्वालिटी तो केवल अल्लाह मे ही हैं , ।
तालियां तो खैर नही बजी पर सबको यह सबक एसा याद हो गया की सब काफी देर तक इसी मौजु पर गुफ्तगु करते रहे।
सायद आज काफि लोगो को एक सच्चे खुदा की पहचान इनायत ने करा दी.
वह भी तीन जबान में...!

पोस्ट का मतलब तो आप समझ ही गये होंगें कि इल्म इंसान के लिये कितना जरूरी है चाहे वह अंग्रेजी का हो या संस्कृत का हो साइंस का हो या मनोवि्ज्ञान का हो ....!
जो लोग केवल मजहबी तालीम को बेहतर मजबुत मानते. हैं मै उनके खिलाफ नही हूं ,मै  तो बस यही कहना चाहता हूं कि उस  कमजोर एकाडेमिक   इल्म को भी मजहबी तालीम के साथ मिलाकर ताकत दें सहारा दें कि वह भी आपके मजहब मे रहकर अपना सिर उठाकर चल सके।
अपने बच्चो को इनायान की तरह बनायें , उन बच्चो की जरूरत यह है कि उनको बेहतर शिक्षा मिले नाकि आपकी या हमारी सेलेक्ट की हुइ ...।

"इनायान को मेरा सैल्युट"
अल्लाह , अलमुसव्वीरू, अल वकीलु , अस् समद , अल कादिरू, अल हक्कु अल मुतक्कबीरु , अल वाहिदु अलमलिकु ।।
परवरदिगार हम सबको पूरी कायनात को सही तौर पर कुरान पर अमल करने की तौफिक अता फरमाये।
आमीन

जावेद अहमद
( मेरठ)

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