औरत की ताकत उसके जज्बात मे होती है..!आम औरत जब प्यार करती है तो सबसे पहले अपने जज्बात देती है। वह जिस्म दे या न दे लेकिन उसके आंसू, उसकी खुशी, उसकी दुआ बस इसी इंसान से मंसूब हो जाते हैं। जिससे वह मुहब्बत करती है। औरत आखिर टूट ही जाती है, फिर अपनी जिंदगी में कभी किसी और इंसान को आने नहीं देती। ना किसी पर एतबार करती है ना शादी का नाम लेती है।शादी कर भी ले तो भी सारी जिंदगी जिंदा लाश बनकर गुज़ार देती है, और अपने खानदान को संभाल नहीं पाती।मै मर्दो के खिलाफ नहीं हूँ बस इतनी दरखास्त करना चाहती हूं कि इंटरनेट की अक्सरियत लड़कियां भोली होती हैं। उन्हें तवायफ समझकर मुहब्बत का खेल न खेलना। यह टूट जाएगी और अगर औरत टूट जाए तो एक खानदान, एक नस्ल टूट जाती है।खुदा के यहाँ अपना नाम ज़ालिमिन में मत लिखवाना, याद रखो, नेकियों के खजाने और पहाड़ जमा भी लोगे, लेकिन यह जुल्म जन्नत मे तुम्हारे दाखिले की रुकावट जरूर बनेगा। बेबस आंसुओं और आहों की बददुआ मत लो।और मेरी लड़कियों से गुजारिश है कि अपनी खुद हिफाज़त करें, अपनी जिंदगी से प्यार करे। बेगैर निकाह मुहब्बत, मौत का खेल है जिसकी कद्र कोई नहीं करता। वह भी नहीं जो आप को तवायफ़ समझकर आपके जज्बात तक पहुंचकर अपने अंदर की औरत को खींचकर सरबाज़ार लाना चाहता है..।
Comments
Post a Comment