शक्सियत की सियासत

जब हज़रत उमर का आखिरी वक़्त आया तो लोगों ने कहा कि आपके बेटे अब्दुल्ला में खलीफा बनने की सारी खूबियां मौजूद हैं. इस पर हज़रत उमर ने कहा
''खिलाफ़त अगर कोई नेकी थी तो वो उमर के घराने को मिल चुकी और अगर कोई इम्तेहान था तो उमर ने दे दिया ''
आपने 6 लोगों को नामज़द किया कि वो नए खलीफा को चुन लें. ये 6 लोग थे
1- उस्मान बिन अफ़्फ़ान
2- अली बिन अबु तालिब
3- अब्दुर रहमान इब्ने औफ़
4- साद बिन अबी वक़्क़ास
5-तल्हा इब्ने अब्दुल्ला
6-ज़ुबैर इब्ने अव्वाम
अब आप सोच सकते हैं कि हज़रत उमर के लिए खिलाफ़त कितनी अहम चीज़ थी. अपने बेटे को खलीफा बनाना तो दूर शूरा में भी नहीं रखा. क्या कोई भी हुकूमत का तलबगार ऐसा कर सकता है.? होना तो चाहिए था कि हज़रत उमर के सारे बेटे किसी ऊंची पोस्ट पर होते मगर ऐसा नहीं है.
जी हां. ज़माने का रूख पलट देने वाले ऐसे ही होते हैं बेशक हज़रत उमर युगदृष्टा और महान नायक थे क्यूँ कि आपके आक़ा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आपकी तरबीयत बेहतरीन तरीक़े से की थी ।।
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