"मेरी बेटी क़ातिल है"
Part -1
(जावेद अहमद ,मेरठ)
रिहान बड़ी तेजी मे घर मे दाखिल हुआ ,आदत के हिसाब से वह अक्सर सलाम किया करता था पर आज उसके माथे पर ,पसीना कुछ नागवार अमल को सहने से था या कुछ गल्तफहमी थी जो उसको बेवजाह ...गुस्सा करने पर मजबुर कर रहा था...?
अम्मी ,अम्मी कहां हो तुम ...जरा मेरी बात सुनो मै बहुत गुस्से मे हूं परेशानी मेरी बरदास्त से बाहर है!
अम्मी ( जुबैदा) ...हां बेटा!.. क्या बात है , सब खैरियत तो है,?.
क्यों गुस्सा कर रहा है? अम्मी मै कैसे बताउं आपको मैने कभी सोचा भी नही था कि आपकी तरबियत मे कभी कमी भी हो सकती है.... अल्लाह ...! यह दिन मुझे न दिखाता ... मेरे मौला... !
अम्मी :-आखिर क्या हुआ ?... मुझे भी कुछ बतायेगा...? क्या बताउं आपको ,सायद आप भी मेरी तरह यकीन न कर सके...नही मेरे प्यारे बेटे एसा कैसे हो सकता है कि मै अपनी औलाद की बात पर यकीन न करूं , तुम्ही तो मेरी जमां पूंजी ह़ो , मेरा सहारा हो ...जल्दी बता क्या हो गया....
रिहान:- अम्मी वो , अम्मी वो, नेहा तुम्हारी बेटी... जिसे तुम अपना गुरूर कहती हो... वो आपका गुरूर... .? क्या कह रहा है रिहान तू मेरी तो कुछ समझ नही आ रहा.....
....
...
(जारी रहेगा)
( यह पूरी तरह से जहन से पैदा किया गया है , किसी पात्र की अधिक आलोचना केवल एक तरह का मैसेज होगा)
.................
"मेरी बेटी क़ातिल है"
Part-2
( जावेद अहमद मेरठ)
।।।
अम्मी-:घबराते हुए रिहान एसा क्या कर दिया नेहा ने क्यो तु इस तरह की बात कर रहा है बेटा?
अम्मी' मै काफि दिनो से उसके रवय्ये मे तब्दीली देख रहा था , उसकी कॉलेज क्लासेस खत्म होने पर भी वह काफि वक्त वहीं कॉलेज मे गुजार रही थी।
मैने सोचा सायद कुछ काम हो पर यह उसकी रोजमर्रा की आदत मे सुमार होने लगा था...।
अम्मी- समझाने की कोशिस करते हुए ,"बेटा"इस मे क्या नाराजगी जरूर कोइ काम रहा होगा।
रिहान:-हां सायद यूहीं होता...।
अम्मी-- : बेटी है ,नाजुक है अगर कोइ गल्ती कर भी दी है ..तो मै ओर तु मिलकर समझाते हैं , मान जायगी आखिर पढी लिखी लडकी है...!
रिहान -: बस ! अम्मी बस! यह पढाइ लिखाइ का तम्गा लगा कर आप "नेहा " की गल्ती से लापरवाह नही हो सकती..!
आप उसको अभी फोन कीजीये ओर फौरन घर पर आने को कहिये..।
ठीक है बेटा मै अभी फोन करती हूं...!
📞....... नेहा !..! बेटी तेरी अम्मी बोल रही हूं.!
जी अम्मी कहिये ।।'
बेटी कहां है ? घर कब आना होगा?
नेहा:- अम्मी सायद कुछ ओर वक्त लगे ,मै फिर भी जल्द आने की कोशिस करूंगी...
ठीक है बेटी ।।
.......
(जारी रहेगा)
Part -1
(जावेद अहमद ,मेरठ)
रिहान बड़ी तेजी मे घर मे दाखिल हुआ ,आदत के हिसाब से वह अक्सर सलाम किया करता था पर आज उसके माथे पर ,पसीना कुछ नागवार अमल को सहने से था या कुछ गल्तफहमी थी जो उसको बेवजाह ...गुस्सा करने पर मजबुर कर रहा था...?
अम्मी ,अम्मी कहां हो तुम ...जरा मेरी बात सुनो मै बहुत गुस्से मे हूं परेशानी मेरी बरदास्त से बाहर है!
अम्मी ( जुबैदा) ...हां बेटा!.. क्या बात है , सब खैरियत तो है,?.
क्यों गुस्सा कर रहा है? अम्मी मै कैसे बताउं आपको मैने कभी सोचा भी नही था कि आपकी तरबियत मे कभी कमी भी हो सकती है.... अल्लाह ...! यह दिन मुझे न दिखाता ... मेरे मौला... !
अम्मी :-आखिर क्या हुआ ?... मुझे भी कुछ बतायेगा...? क्या बताउं आपको ,सायद आप भी मेरी तरह यकीन न कर सके...नही मेरे प्यारे बेटे एसा कैसे हो सकता है कि मै अपनी औलाद की बात पर यकीन न करूं , तुम्ही तो मेरी जमां पूंजी ह़ो , मेरा सहारा हो ...जल्दी बता क्या हो गया....
रिहान:- अम्मी वो , अम्मी वो, नेहा तुम्हारी बेटी... जिसे तुम अपना गुरूर कहती हो... वो आपका गुरूर... .? क्या कह रहा है रिहान तू मेरी तो कुछ समझ नही आ रहा.....
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(जारी रहेगा)
( यह पूरी तरह से जहन से पैदा किया गया है , किसी पात्र की अधिक आलोचना केवल एक तरह का मैसेज होगा)
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"मेरी बेटी क़ातिल है"
Part-2
( जावेद अहमद मेरठ)
।।।
अम्मी-:घबराते हुए रिहान एसा क्या कर दिया नेहा ने क्यो तु इस तरह की बात कर रहा है बेटा?
अम्मी' मै काफि दिनो से उसके रवय्ये मे तब्दीली देख रहा था , उसकी कॉलेज क्लासेस खत्म होने पर भी वह काफि वक्त वहीं कॉलेज मे गुजार रही थी।
मैने सोचा सायद कुछ काम हो पर यह उसकी रोजमर्रा की आदत मे सुमार होने लगा था...।
अम्मी- समझाने की कोशिस करते हुए ,"बेटा"इस मे क्या नाराजगी जरूर कोइ काम रहा होगा।
रिहान:-हां सायद यूहीं होता...।
अम्मी-- : बेटी है ,नाजुक है अगर कोइ गल्ती कर भी दी है ..तो मै ओर तु मिलकर समझाते हैं , मान जायगी आखिर पढी लिखी लडकी है...!
रिहान -: बस ! अम्मी बस! यह पढाइ लिखाइ का तम्गा लगा कर आप "नेहा " की गल्ती से लापरवाह नही हो सकती..!
आप उसको अभी फोन कीजीये ओर फौरन घर पर आने को कहिये..।
ठीक है बेटा मै अभी फोन करती हूं...!
📞....... नेहा !..! बेटी तेरी अम्मी बोल रही हूं.!
जी अम्मी कहिये ।।'
बेटी कहां है ? घर कब आना होगा?
नेहा:- अम्मी सायद कुछ ओर वक्त लगे ,मै फिर भी जल्द आने की कोशिस करूंगी...
ठीक है बेटी ।।
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(जारी रहेगा)
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