शादी से घबराहट

"शादी से घबराहट"

निकाह का दिन करीब था. सद्दाम भाई ने अपनी कमाइ मे भी इज़ाफा करने की कोशिस की ,ओर अपनी मॉटरबाइक की सॉप पर ,ओर दो-तीन लड़के एक्सट्रा रख लिये, ज्यादा से ज्यादा बाइक को खोल - खोल कर दुकान के आगे पटक दी, जिससे दुकान का एडवटाइचमेंट हो , ओर ग्राहक उनकी ही दुकान पर आ धमके...!
खैर कमाई मे ईजाफा भी हुआ
 हालाकि सद्दांम भाइ की उम्र अभी तकरीबन उन्नीस साल ही की है, पर बडी़ लडकी आसमां की  शादी कराने के बाद इनके वालिदेन पर ओर कोई काम नही रहा था , इसी वजाह से अब उनकी तमन्ना को सद्दाम की शादी ही पूरा कर सकती है!...
 अपने कमउम्र मन को समझाते हुए ओर बेतजुर्बेदार लोगो की राय पर वह अब शादी के लिये तैयार होने की कोशिस करने लगा था..!
 उधर "सना"( जिससे सद्दाम का रिस्ता हो चुका है) ज़्यादा फिक्रमंद नही है, उसकी वजाह है सना की उम्र...
 सायद यह बात हैरान करने वाली हो कि सना उम्र के एतबार से पाँच साल ज्यादा दुनिया देख चुकि है...
 वह अब पच्चीस साल की है, ओर इसका
 यह उम्र मे ब़ड़ा होना ,अभी सद्दाम के इल्म मे नही है
 धीरे -२ निकाह का दिन करीब आ ही गया...!
आज सद्दाम का निकाह है, हर तरफ लोग तफरी कर रहें हैं, पता नही सद्दाम वेवजाह क्यो नखरे दिखा रहा है,? सायद उसके बहनोइ ने उसके निकाह के जोड़े मे कंजूसी कर ली..
 या जिस किस्म की महंगी "बस" वह अपनी शादी मे लेजाना चाहता था उसके वालिद साहब ने उसको रद्द कर दिया, ओर एक डग्गामार बस में बारात को ले जाने का आखिरी फैसला ले लिया,
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शौकीन साहब जो वालिद हैं सद्दाम के , हमेशा शख्त फैसले लेने मे मश्हूर हैं..!
बहरहाल" सद्दांम" जो सोच मे पडा़ हुआ था  , वालिद के फैसले के आगे घूटने टेक कर तैयार हो गया, मारूति ऑल्टो पर कुछ फूल लगाकर कार एसी तैयार की गइ जैसे सद्दाम का नही बल्कि इस कार का ही निकाह हो, ...अब सद्दाम बिल्कुल आग बबुला हो गया
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सद्दाम:-अम्मी कहां है बुलाना जरा..!
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परवेज( छोटा भाइ) :- अम्मी तो सुनार के यहां गइ हैं !
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सद्दाम:- फोन मिला( कॉल कर)
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परवेज:- मेरा फोन भाई ( बहनोइ "हारून") पर है!
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सद्दाम:-यह भी कोइ शादी मे लेजाने लायक कार है?
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वालिद :- अबे मेरी बारात टैक्टर मे गई थी , चुपचाप बैठ इसमे..!

परवेज:- सद्दाम भय्या "अम्मी आ गइ...!
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सद्दाम को अब अपनी अम्मी को नजदीक आते देख ,मानो एसा लग रहा था जैसे मर्सटीज़ आ रही हो!...

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वालिदा (  नाम-मीम) :- हाँ बेट्टे के बात है ( हरियानवी क्षेत्र से हैं)
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सद्दाम :- अम्मी ' चाहे बारात जाये या न जाये ' मै इस कार मे नही जाउंगा , कम से कम कार तो अच्छी सी कर लेते , इतना बखीलपन भी सही नही..कमा तो मै ही रहा हूं ,
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वालिदा:- यो हारून कां है? बुलय्यो जरा इसे .!

हारून :- बेफिक्र रहो , दूसरी कार आ रही है !
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परवेज :- भाई कौनसी कार आ रही है?
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हारून :- जब आ जाइगी तो देख लेना!

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हारून :- (अासमां से रूआब दिखाते हुए )...
मेरा मोबाइल कहां फेक रखा है , तुझसे तीन दफा मैने फोन मांगा पर, मैडम को कोइ परवाह ही नही़, जल्दी ला मोबाइल गाड़ी वाले को फोन करना है !
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सद्दाम' जो कभी एक सख्त  लफ्ज भी अपनी बहन के लिये नही सुनता था, आज हालात के सामने खामोश है,

( गाडी़ वाले की एंट्री)
ड्राइवर :- हांजी यहीं से जानी है , बारात
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हारून:- बिल्कुल सही जगाह पर खड़े हो आप..!
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ड्राइवर ;- देखो भाइ मैं पूरे पाँच हजार रू लूँगा ओर एक बात ओर मैं वेजेटेरियन हूं , खाना आपको ही होटल पर खिलाना होगा...!( तकब्बूर भरे लहजे में)

सद्दाम :- हारून भाइ ये पैसे कुछ ज्यादा नही मांग रहा..?

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हारुन:- ड्राइवर साहब हमारी तो प्रति/किमी० पर बात तय हुइ थी ,फिर ये रवैय्या क्यों , भाइ बारात ज़्यादा दूर तो जानी नही  है फिर इतना ज्यादा किराया क्यों!

ड्राइवर :- कहां जानी है वैसे ?

परवेज:- ज्यादा से ज्यादा पचास किमी० होगा सफर..!
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सद्दाम ;- अबे बेअक्ल पैंतीस किमी० ही तो है !
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वालिद :- भइ कितने पैसे लोगे जल्दी बताओ , लड़की वालो का फोन आ रहा है ,( जबकि कोइ फोन नही आरहा )

ड्राइवर :- तीन हजार लास्ट है .

हारुन :- डन !!!  .बैठ भइ सद्दाम जल्दी ...-!



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( सद्दाम की कार मे एंट्री)..

सद्दाम :- [मौजुदा मेहमानो से]
केवल खास - खास लोग बैठें मेरे साथ और एक एसा शख्स भी बैठ जाये  , जो रास्ता जानते हों!
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"परवेज" पहले से ही कार की अगली सीट पर सवार था..!

वालिद:- चलो जी ड्राइवर साब.. आप अपनी कार आगे बढाओ ...ओर बस पीछे -पीछे आ रही है!

ड्राइवर : अरे !  मियां कैसी बात कर रहे हो  ,खुशी का मौका है ,कुछ " नेग" ( टीप , बक्सीस) तो कराओ, ये दिन कोइ रोज - रोज कोइ आता है!....

वालिद :- भई नेग तो लड़के का फूपा देगा...!

यूसुफ( फूपा). ;- ले यार तू पकड़ , और चल जल्दी ...!

ड्राइवर : आपने तो बिल्कुल हद कर दी यह केवल दस रू० हैं ,

हारून :- वहीं चलकर बात करेंगे....

ड्राइवर :- चलिये जैसी आपकी मर्जी|
{ कार इनोवा रवाना हो चली}
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सद्दाम :- यार एसी तो ऑन करो...उमस हो रही है,!

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ड्राइवर :- ए सी नही चलेगी भाइ .... इसके अलग से दो सौ रूपये लगेगें *एवरेज* पर फर्क पड़ता है!....!

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सद्दाम :-( गुस्से मे) तो भाइ इसको लगा क्यों रखी है , क्यों गाड़ी मे ओवर लोड कर रहा है?

ड्राइवर ( खामोशी के साथ स्पीड बढाते हुए)

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आखिर ड्राइवर ने बारात को मकाम पर पहुंचा ही दी...!
तकरीबन पांच किलो का शेहरा जिस्म पर लटकाए..ओर हाथ मे महंगा सेलफोन लिये सद्दाम अपने बैठने के कक्ष की तरफ चल पड़ा...!
बच्चो ने शौर मचया " बारात आ गइ , "बारात आ गइ" यह खबर सुनकर लड़की पक्ष चौकन्ना सा हो गया !
( उसी दौरान)

नइम ( लड़की का चाचा)...बीड़ी फेकते हुए ...सद्दाम से हाथ मिलाने के लिये हाथ बढाया!

*अस्सलामुअलैयकुम *
नइम :- कैसा रहा सफर ? कोइ दिक्कत परेषानी तो नही हुइ ?

सद्दाम ,(अपने जीजा की तरफ इसारा करते हुए)

हारून :- नही - नही कोइ परेशानी नही हुइ , और आपके रहते क्या हो सकता है ( रब को भुलते हुए इंसान को तर्जी दी)
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रहबर:- पापा जी भाइ का मुह तो दिखवाओ...!

नइम :- हां हां अब तो यह तुम्हारे ही हो गये ...पर भाग के जा ओर बडे़ भ़य्या से कह के बारात आ गई "शरबत" लेकर दो तीन लडके फटाफट आएं...!

{ लडको की एंट्री}
अस्सलामुअलैयकुम, भाइ ,अस्सलामुअलैयकुम, भाइ
 सद्दाम :- अपने बैठने की जगाह से खसकते हुए ,वालेयकुमअस्सलाम.....!

लडके:- ला बे भाइ को शरबत दे , जल्दी ..!
जैसे हि शरबत का गिलास पेश किया गया तो नजर उसकी किनारी पर गइ सायद किसी ने बड़ी बेदर्दी से पहले उसमे शरबत गटका था " किनारी चारो तरफ से कोरमे के रोगन से सनी हुइ थी चिकनाइ से सरावोर थी...!

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सद्दाम :- न मै नही पी रहा , शरबत मेरा गला जरा खराब है..( न पीने की वजाह पाठक जानते हैं)
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लड़के:- भाई मर्द बनो यार...शेरो के गले कभी खराब नही हुआ करते!

हारून:- यहां पर मर्द बनकर ही आये हैं! मेरे भाइ....*

(लड़को को यह मजाक भारी पड़ गइ ओर तंज को गले से उतारना पडा़)

परवेज : हारून भाइ देख कर मजाक किया करो यार...तुम भी बस..!

>कमरे का विवरण जहां सद्दाम को बैठाया गया<

~एक कमरा जिसमे डार्क लाल कलर का पेंट किया हुआ था.
~सिलिंग फैन कि जगाह झुमर लगा रखा था.
~ सौ वॉट का पीला बल्ब लगा हुआ था , जिससे भीतर बैठे लोगो के चेहरे बंदर की बंब जैसे लाल लग रहे थे.
~एक खिड़की थी जो ,अंदर की तरफ खुलती थी.फिलहाल बंद थी.
~जगाह कम होने की वजाह से एक तूफान पंखा बिल्कुल खिड़की से सटा कर रख दिया था
~पंखा भारी था ओर यह भी अफवाह थी के इसमे करंट रवां है , हाथ लगाने से बचने के निर्देश थे हवा भी जरा कम ही दे रहा था

~एसा मन कर रहा था के पखें को हटाकर खिडकी खोली जाये जिससे कुछ ऑक्सीजन ग्रहण कर सके...!

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औरते जो अकसर दुल्हे को देखने के लिये बेचैन सी रहती हैं ,उनका एक - एक कर के आना सुरु हो गया  , कुछ छोटी लड़कियां अपने -अपने भाइ या बहनो के लेटेस मोबाइल लेकर फोटो खिंच रहे थे, !

अब तो हद ही हो गइ थी , एक तो कमरे मे इतनी उमस थी के , सांस लेना दुबर था  , दूसरी तरफ अब कॉस्मेटिक से सरावोर और रिस्तेदार औरतें , सर पर हाथ फेर रही थी, और जबरदस्ती की हंसी भी हस रही थी...!

 सबा-:(लडकी की भाभी) ,इतनी गर्मी हो रही है, यह शेहरा तो उतार दो ,

सद्दाम :- नही ,नही कोइ बात नही , हमे तो धूप मे रहने की आदत है , गर्मी भी बरदास्त कर लेंगे...!

सबा:- मजाक भरे लहजे मे " ओह ! हो...! पर हमारी सना फूलो मे पली है ,इसको धूप मे मत  लेकर घूमना...*

हारून:- आप इंतजाम कर दो छाव मे घूमने का हम तो आपके ताबे हैं ( जहेज मे कार  की उम्मीद जाहिर करना)

सबा:; - तंज करते हुए , क्यों जिन के पास छांव का इंतेजाम नही होता उनकी बीवीयां धूप मे ही रहती होंगी , क्यो जी बताओ..?

हारून ;- हम तो घर से बाहर ही नही निकलने देते ,  सूरज को देखे भी साल हो जाता है ( अपनी खीज निकालते हुए)

सबा:- हम तो आजाद जहन दिमाग के मालिक की मिल्कीयत हैं , हम पर आप जैसे लोगो का हुक्म लाजिम नही होगा , आज तो अल्लाह का शुक्र अदा करूंगी तहज्जुद पढ़ कर ( रात के वक्त पढ़ी जाने वाली नमाज) कि अल्लाह ने एसे बखील जहनियत के लोगो से हमे बचाए रखा...!

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मुअज्जिन ने पुकारा' वक्त दो बज  चुके थे...!

शादी मे तमाम लोगो के लिबास साफ सुथरे से ,पर पता नही क्यों  कुछ लोग नमाज की तरफ नही जा रहे थे...!

सबा :-'सर पर दुपट्टा सही करते हुए,  ओह अल्लाह...! आजान हो गइ चलो नमाज पढ़ते हैं , भाइ आप भी नमाज के लिये चले जाओ ,यही सीधे हाथ की तरफ ही मस्जिद है...

सद्दाम:- ठीक है, अपने बहनोइ की आंखो मे एसे देख रहा था जैसे दुल्हे पर नमाज ही फर्ज नही हुइ हो ( अक्सर लोग अपने निकाह के दिन नमाज छोड़  देते है, एसा करने से बचना चाहिये , निकाह तो सुन्नत है जबकि नमाज फर्ज)

हारून :- परवेज के कोहनी मारकर ,चल बे नमाज पढके आ, घर पर तो बड़ा मुल्ला बनता फिरता है,

परवेज:- जा तो रहा हूं!....तुम भी चलो मेरे साथ

हारून:- "समझा कर यार , कल से शुरू कर दूंगा , आज जरा दिक्कत है!

<< लड़की के भाइ " आसिफ"की एंट्री>>>

आशिफ :- हांजी जरा एक मिनट बाहर आना ,

सबा:- अपनी भतीजी से मंद से लहजे मे " बता नही सकती थी , के  तेरे चाचा आ रहे हैं
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हारून:- हांजी कहिये,,,?

आशिफ :- निकाह की तैयारी हो गइ है बस नमाज के तुरंत बाद निकाह होगा...

हारून :-ठीक है जी,, बहोत बढ़िया....!

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सद्दाम के दिल मे एक अजबसी लहर उठी.. सायद जिस पल के लिये वह बेहद मुंतजिर था वह धीरे धीरे करीब आ ही गया...!

 दोपहर के दो बजने के बाद भी दुल्हे ने खाना नही खाया था ।सायद निकाह के बाद ही खाना खिलाने की रस्म होती हो मुहासरे मे (दीन रस्म पर रोक लगाता है, इस तरह की रस्म इसलाम का हिस्सा न कभी थी न होगीं )

पर सद्दाम को अभी इतनी भूख नही सता रही क्यो कि " निकाह " का एलान जो हो गया था ।।।

सद्दाम जो दीवार के सहारे कमर सटा कर बैठा था .....काजी के आने पर फुर्ती से उठकर बैठ गया , और रूमाल से अपने पशीने को चेहरे से हटाते हुए तरोताजा होने की कोशिस करते हुए।

तमाम लोगो उस संकरे से कमरे मे जबरदस्ती घुस रहे थे , कुछ नौजवान सायद इस लिये वहां से हटना नही चाहते थे कि वह अपने निकाह ,जो होने वाला था ,उसमे पूरी तरह तैयार रहना चाहते थे , बडी़ गौर से निकाह के हर एक पहलु को देख कर कुछ सीख रहे थे।

काजी साहब ने निकाह की सुरूआत की .....

मस्जिद से आये हुए एक शाहगिर्द ने काजी साहब को एक रजिस्टर पकडाते हुए कुछ कान मे कहा ...जिस को सद्दाम ने गौर से सुनने की कोशिस की .. सद्दाम को लगा सायद कुछ परेशानी है?...
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जिस वक्त शाहगिर्द काजी साहब के कान मे कुछ कह रहा था तो , पूरा मजमा बड़ा ही तव्ज्जो की नजर से उन दोनो पर नजर लगाये हुए था...।

उनको लगा सायद कोइ गडबडी हो गइ है, ...

एक बुजुर्ग :- क्या हुवा इमाम ( काजी आजकल इमाम ही काजी हैं) साहब?

काजी साहब खामोस रहे, ओर इशारे करती हुइ आंखो से शाहगिर्द से कुछ कहा...

वह शाहगिर्द बडी़ तेजी के साथ मजमे से उठा और रफ्तार के साथ रवाना हो गया...'

सद्दाम बडा असमंजस मे था आखिर ये क्या हो रहा , है..?
और जो भी हो रहा है मेरे निकाह मे हि क्यो हो रहा है,..?

आसीफ :- मौलाना ,सब ठीक तो है ना कोइ परेशानी तो नही...?

मौलाना:- नही ,नही सब ठीक है, असल मे वह शाहगिर्द जो रजिस्टर ( निकाह का) लाया था, वह पूरा भरा हुआ था,।
उसी को लाने गया है , मै उसको पिछली बार समझाते हुए कहा था कि नये रजिस्टर  लाकर रखले , पर नालायक मे काहिली बहुत है( याद रहे काहिली बहुत ही बुरी अलामत है,नबी करीम स० ने हमेशा काहिली व सुस्ती से पनाह मांगी है)

हारून:- कितना टाइम लगेगा,? रजिस्टर आने मे ,
काजी साहब:- अरे मियां यही तो गया है , करीबी मार्केट में , जल्द ही आ जायगा।

नइम :- देखो जी ,अगर ज्यादा वक्त लगेगा तो हम खाना खिलवादे फिर निकाह करेंगे
.....
यह खबर दुल्हे के दोस्तो के लिये , एसी थी, मानो जन्नत से बुलावा आया हो , बेचारे भुख से परेशां जो थे , पर इस शर्म से नही खा रहे थे कहिं सद्दाम बुरा मान जाये....

(जारी रहेगा)

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